राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के दो साल पूरे, कांग्रेस ने जारी किया खास संदेश

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के तौर पर अपने कार्यकाल के दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। राहुल गांधी ने देश की जनता को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र और मुख्य विजन हर एक भारतीय नागरिक की बुनियादी समस्याओं और उनकी आवाज को देश के शीर्ष शासकों तक पहुंचाना है। उन्होंने देशवासियों को यह दृढ़ भरोसा भी दिलाया कि नीट (NEET) परीक्षा विवाद से प्रभावित युवाओं, देश के संविधान की हिफाजत और लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने जैसे अहम मुद्दों पर उनका लोकतांत्रिक संघर्ष भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

जनता की आवाज को देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गलियारे तक पहुंचाया: राहुल गांधी

अपने दो वर्षों के संसदीय सफर और अनुभवों को याद करते हुए कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विपक्ष के नेता के रूप में उनका बीता हुआ हर एक पल आम जनता की सामूहिक ताकत और उनकी समस्याओं को संसद और केंद्र सरकार के पटल पर रखने के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा, "आज मुझे देश की लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी संभाले हुए पूरे दो वर्ष का समय बीत चुका है। इस समयावधि का एक-एक दिन सिर्फ इसी प्रयास में गुजरा है कि किस प्रकार हिंदुस्तान के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की आवाज को भी देश की सत्ता के सर्वोच्च गलियारों में पूरी मजबूती और गूंज के साथ सुनाया जा सके।"

युवाओं के हक, चुनावी विसंगतियों और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा रहूंगा साथ

अपने अब तक के सेवाकाल का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने जनहित से जुड़े कई बड़े विषयों को सदन के भीतर और बाहर पुरजोर तरीके से उठाया है। चाहे वह नीट परीक्षा में धांधली की शिकायतें लेकर सड़कों पर उतरे लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य की लड़ाई हो, चुनावी प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना हो या फिर देश के बुनियादी कानून यानी संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखने का बड़ा सवाल हो, वे हर मोर्चे पर नागरिक अधिकारों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, "मैं अतीत में भी आपकी हक की लड़ाई का हिस्सा था, वर्तमान में भी आपके हक के लिए मुस्तैद हूं और आने वाले समय में भी हर जन-आंदोलन में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा। सड़क से लेकर संसद के फर्श तक, देश की जनता का अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और मार्गदर्शक रहा है। मंजिल अभी दूर है, लेकिन मेरा संकल्प अटल है।"

एक दशक के लंबे इंतजार के बाद देश को मिला था प्रतिपक्ष का नेता

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने जून 2024 में देश की संसद में नेता प्रतिपक्ष का औपचारिक पदभार ग्रहण किया था। देश के संसदीय इतिहास में यह पद करीब दस साल (एक दशक) तक रिक्त रहा था, क्योंकि 16वीं और 17वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान देश के किसी भी विपक्षी राजनीतिक दल के पास इसके लिए जरूरी न्यूनतम सदस्य संख्या उपलब्ध नहीं थी। संसदीय नियमावली और परंपराओं के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का आधिकारिक दर्जा हासिल करने के लिए किसी भी मुख्य विपक्षी दल के पास सदन की कुल 543 सीटों में से कम से कम 10 प्रतिशत यानी न्यूनतम 55 सीटें होना अनिवार्य है।

2024 के आम चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अकेले 99 संसदीय सीटों पर विजय पताका फहराई और इस अनिवार्य तकनीकी आंकड़े को आसानी से पार कर लिया, जिसके बाद सर्वसम्मति से राहुल गांधी इस पद पर आसीन हुए। साल 2004 में संसदीय राजनीति के सफर की शुरुआत करने के बाद यह राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का पहला बड़ा संवैधानिक और आधिकारिक दायित्व है। इसके साथ ही, वे नेहरू-गांधी परिवार के ऐसे तीसरे राजनेता बन गए हैं जिन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे गरिमामयी पद का निर्वहन किया है। उनसे पहले उनकी माता सोनिया गांधी और उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी भी विपक्ष के नेता के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।