विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक राजनयिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंच गए हैं। सेशेल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वहां के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल से परे जाकर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री को प्रतिष्ठित 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। हवाई अड्डे पर मौजूद प्रवासी भारतीय समुदाय के नागरिकों ने भी पारंपरिक कच्छी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ देश के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इसके पश्चात, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने विक्टोरिया स्थित प्रसिद्ध नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भ्रमण किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एक स्मृति पौधा रोपा, बल्कि वहां के मुख्य आकर्षण माने जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के 'एल्डाब्रा जाइंट' कछुओं को अपने हाथों से भोजन भी कराया।
स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती, जोनाथन कछुए का इतिहास और दीर्घायु का वैज्ञानिक रहस्य
यह राजकीय यात्रा वैश्विक स्तर पर इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि २९ जून २०२६ को प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जो इस द्वीपीय राष्ट्र की स्वतंत्रता के ५० वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य परेड में भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोतों के साथ सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी। सेशेल्स के कछुओं की विशेषता को देखें तो यहां पाए जाने वाले एल्डाब्रा जाइंट कछुए अपनी १५० वर्ष की औसत आयु के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं, जिनमें १९४ वर्षीय 'जोनाथन' को विश्व का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कछुओं के इतने लंबे जीवनकाल के पीछे उनकी अत्यंत धीमी चयापचय (धीमी जीवनशैली) प्रणाली है, जिससे उनकी शारीरिक कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी नहीं होतीं, साथ ही उनका अभेद्य और सख्त बाहरी कवच उन्हें प्राकृतिक शत्रुओं व आंतरिक बीमारियों से जीवनभर सुरक्षा प्रदान करता है।
द्विपक्षीय संबंधों के ५० वर्ष, विजन महासागर और नेशनल असेंबली में संबोधन
भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना का यह ५०वां वर्ष है, जिसे रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स को भारत के 'विजन महासागर' (MAHASAGAR) का एक अपरिहार्य और मजबूत समुद्री साझेदार बताया है। फरवरी २०२६ में राष्ट्रपति हर्मिनी की सफल भारत यात्रा के बाद हो रहे इस दौरे में दोनों राष्ट्रों के बीच हिंद महासागर की सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि को लेकर कई उच्चस्तरीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को संबोधित करने वाले भारत के इतिहास के पहले प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस ऐतिहासिक पहल से न केवल सदियों पुराने लोकतांत्रिक और विधायी मूल्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी नौसैनिक सहयोग भी एक नए युग में प्रवेश करेगा।
इंदिरा गांधी के दौर की कूटनीति, सामरिक निगरानी और चीन की घेराबंदी का रोडमैप
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वर्ष १९७६ में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां का दौरा किया था और भारत ने अपनी नौसेना का पराक्रमी युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी वहां भेजा था। वर्ष १९८१ में उनके दूसरे दौरे के बाद लगभग ३४ वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की सुध नहीं ली, जिसके बाद २०१५ में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां की यात्रा कर इस कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त किया था। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब चीन हिंद महासागर के छोटे द्वीपीय देशों में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ाने की निरंतर कोशिश कर रहा है, भारत ने सेशेल्स की तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए उसे दूसरा अत्याधुनिक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपने की आधिकारिक घोषणा की है। इसके साथ ही, भारत के सहयोग से निर्मित अत्याधुनिक तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन पर पैनी नजर रखने और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की सामरिक नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बेहद निर्णायक और दूरगामी कदम है।









