रेलवे पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चोरी के आरोपी को दबोचा

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जबलपुर: शासकीय रेल पुलिस (जीआरपी) ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक शातिर और आदतन वाहन चोर को धर-दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। रेल पुलिस अधीक्षक जबलपुर सुंदर सिंह कनेश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भावना मरावी के कड़े निर्देशन में कटनी रेल पुलिस उप अधीक्षक के मार्गदर्शन में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। जीआरपी चौकी सतना की टीम ने रेलवे कॉलोनी इलाके में घेराबंदी कर न सिर्फ आरोपी को गिरफ्तार किया, बल्कि उसके पास से लूटी गई मोटरसाइकिल भी सकुशल बरामद कर ली है।

जबरन बाइक छीनकर भागा था आरोपी, जीआरपी ने दर्ज किया था केस

इस मामले की शुरुआत फरियादी आकाश चौधरी की शिकायत से हुई थी, जो सतना के बगहा इलाके के रहने वाले हैं। आकाश ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मालगोदाम ऑफिस के सामने एक अज्ञात युवक ने उनसे डरा-धमकाकर जबरदस्ती उनकी काले रंग की हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल (रजिस्ट्रेशन नंबर एमपी 19 जेडडी 4967) छीन ली और मौके से फरार हो गया। इस वारदात को गंभीरता से लेते हुए सतना जीआरपी चौकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी, करीब सवा लाख की मोटरसाइकिल बरामद

वारदात की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी चौकी प्रभारी ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। टीम को जल्द ही मुखबिर से एक सटीक इनपुट मिला कि आरोपी लूटी गई बाइक के साथ रेलवे कॉलोनी के पास छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर चारों तरफ से घेराबंदी की और शातिर आरोपी मनीष मिश्रा को दबोच लिया। छब्बीस वर्षीय आरोपी मनीष मिश्रा सतना जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चौधरी का निवासी है। पुलिस ने उसके कब्जे से लूटी गई बाइक बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक लाख दस हजार रुपये बताई जा रही है।

आदतन अपराधी है पकड़ा गया बदमाश, पुलिस टीम को मिली सराहना

जीआरपी की जांच में यह बात भी सामने आई है कि पकड़ा गया आरोपी मनीष मिश्रा कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि एक बेहद शातिर और आदतन बदमाश है। उसके खिलाफ पहले से ही विभिन्न थानों में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस त्वरित और कामयाब कार्रवाई को अंजाम देने वाली सतना जीआरपी टीम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना की जा रही है। इस पूरी धरपकड़ में चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक राजेश राज के कुशल नेतृत्व के साथ-साथ प्रधान आरक्षक दयाचंद तिवारी, आरक्षक गौरव सिंह और प्रशांत यादव की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने सटीक सूचना जुटाकर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाया।