जौनपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की नोएडा यूनिट को मंगलवार सुबह एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साल 2014 में आगरा के शाहगंज इलाके में हुए बेहद सनसनीखेज डकैती और दोहरे हत्याकांड मामले में पिछले 12 वर्षों से फरार चल रहे एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात अपराधी आसिफ उर्फ विक्की उर्फ छैमार को एसटीएफ ने एक तीखी मुठभेड़ में मार गिराया है। दो बेकसूर महिलाओं की बेरहमी से हत्या करने वाले इस खूंखार गिरोह के तीसरे मुख्य आरोपी के खात्मे के बाद पीड़ित परिवार ने कानून के इस न्याय पर राहत की सांस ली है।
12 साल बाद मिला आंशिक न्याय, पर जख्म आज भी गहरे-
इस मुठभेड़ की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार के सदस्यों की आंखें एक बार फिर नम हो गईं। धीरज सिंह ने बताया कि हालांकि इस कुख्यात अपराधी के मारे जाने से उनके मन को कुछ संतोष जरूर मिला है और यह साबित हो गया है कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं, लेकिन उस काली रात की खौफनाक यादें आज भी पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर देती हैं। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस सामूहिक नरसंहार और डकैती के पांच अन्य आरोपी अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर चल रहे हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पकड़ना बेहद जरूरी है।
क्या थी 2014 की वह खौफनाक वारदात?
यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब छैमार गिरोह के हथियारबंद डकैतों ने धीरज सिंह के घर को निशाना बनाया था। आधी रात को दीवार फांदकर घर में घुसे बदमाशों ने पूरे परिवार को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया था। इसके बाद अलमारियों और लॉकर के ताले तोड़कर लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और भारी नकदी लूट ली थी।
लूटपाट के दौरान जब घर के सदस्यों ने डकैतों का विरोध करने और शोर मचाने का प्रयास किया, तो दरिंदगी पर उतरे बदमाशों ने धारदार हथियारों और लोहे के रॉड से परिवार के पांच सदस्यों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में स्वाति और सुमन नाम की दो महिलाएं गंभीर रूप से लहूलुहान हो गई थीं, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस सामूहिक हत्याकांड से पूरे सूबे में हड़कंप मच गया था।
तीन आरोपी ढेर, बाकी पांच की तलाश में जुटी पुलिस
इस भयावह वारदात के बाद धीरज सिंह की लिखित तहरीर पर स्थानीय पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती, सामूहिक हत्या और आर्म्स एक्ट सहित कानून की कई गंभीर और संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। तफ्तीश के दौरान पुलिस और एसटीएफ ने इस मामले में कुल आठ मुख्य आरोपियों को चिन्हित किया था।
क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीमें लगातार इन आरोपियों के पीछे लगी हुई थीं। मंगलवार को मारा गया आसिफ उर्फ विक्की इस मामले में ढेर होने वाला तीसरा अपराधी है, इससे पहले दो अन्य मुख्य आरोपी भी अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में यमलोक भेजे जा चुके हैं। एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मारे गए आसिफ के पास से अवैध हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी बचे पांच अन्य फरार डकैतों की तलाश में देश के अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही है।









