राम मंदिर चंदे पर सियासी संग्राम, VHP-कांग्रेस आमने-सामने

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अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के चंदे में कथित हेराफेरी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और जांच अधिकारी को लिखे गए एक पत्र ने इस पूरे विवाद को नया सियासी मोड़ दे दिया है। विहिप ने अपने पत्र में मांग की है कि विपक्षी नेताओं को तलब किया जाए ताकि वे राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर लगाए गए अपने आरोपों के आधार और सबूत पेश कर सकें। विहिप के इस कदम के बाद विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी है और कांग्रेस ने इस पर बेहद तीखा पलटवार किया है।

'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' जैसा है विहिप का रुख: केसी वेणुगोपाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने विश्व हिंदू परिषद के इस पत्र को पूरी तरह हास्यास्पद और 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' जैसी स्थिति बताया है। विहिप पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने याद दिलाया कि यह वही संगठन है जिस पर अतीत में खुद निर्मोही अखाड़े ने राम मंदिर के नाम पर 1,400 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप मढ़ा था। वेणुगोपाल ने कहा कि विहिप खुद गंभीर सवालों के घेरे में रही है, और अब वही संगठन उन विपक्षी नेताओं से पूछताछ की मांग कर रहा है जिन्होंने जनता के पैसे की इस कथित लूट पर केवल सवाल उठाए थे। उन्होंने इस मांग को पूरी तरह बेतुका और बेशर्मी से भरा करार दिया।

जांच के दायरे में विपक्षी नेता कैसे? कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए कहा कि जब सब कुछ सत्ता पक्ष के नियंत्रण में है, तो विपक्ष पर उंगली उठाना समझ से परे है। उन्होंने अपनी बात के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए:

  • राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में हुआ था।

  • इस ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय खुद विहिप के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक हैं।

  • ट्रस्ट के चेयरमैन प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव रह चुके हैं, जिन्हें भाजपा सरकार ने पद्म भूषण से भी नवाजा है।

  • केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों ही जगहों पर भारतीय जनता पार्टी की ही सरकारें काम कर रही हैं।

इन तथ्यों को सामने रखते हुए वेणुगोपाल ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव या अन्य विपक्षी नेताओं का इस जांच से क्या और कैसे संबंध हो सकता है? उन्होंने दावा किया कि इस कदम से विहिप और संघ परिवार का असली चेहरा जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो गया है।

भक्तों की आस्था से खिलवाड़ का आरोप, अपनों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही चंदे की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हालिया रिपोर्ट्स ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि इन संगठनों को हिंदू धर्म या भगवान राम की मर्यादा से कोई सरोकार नहीं है। वे केवल करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का इस्तेमाल अपने राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने अंत में कहा कि अगर विहिप को वास्तव में राम मंदिर की पवित्रता और शुचिता की फिक्र है, तो उसने आज तक अपने ही उन पदाधिकारियों के खिलाफ जांच या कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की, जिन पर इस घोटाले को अंजाम देने के आरोप लगे हैं?