कैबिनेट बदलाव की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने छेड़ा ‘राजधर्म’ का मुद्दा

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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड और कामकाज के प्रदर्शन के आधार पर कुछ अहम विभाग वापस लिए जाने की सुगबुगाहट लंबे समय से चल रही है। अब तक नीट यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और शैक्षणिक सुधारों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने के कयास सबसे ज्यादा लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इस संभावित सूची में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी प्रमुखता से जुड़ गया है।

निजी स्टाफ पर गिरी गाज, पीएमओ से कार्रवाई की चर्चा

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम इस फेरबदल की रेस में तब सामने आया, जब हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय में एक साथ तीन बड़े अधिकारियों को पद से हटा दिया गया। इसमें मंत्री के निजी सचिव (PS) को "प्रशासनिक आधार" पर हटाया गया, जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवाएं समाप्त कर दी गईं और दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को समय से पहले उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। राजनीतिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते यह सख्त कार्रवाई सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश पर की गई है।

कांग्रेस ने याद दिलाया 'राजधर्म' और लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी सरकार और भूपेंद्र यादव पर चौतरफा हमला बोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारतीय राजनीति में नैतिक जिम्मेदारी का सवाल उठाते हुए कहा कि ठीक 70 साल पहले एक रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा देकर नैतिकता की जो मिसाल पेश की थी, आज के दौर में उसे भुला दिया गया है।

जयराम रमेश ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जब किसी मंत्री के सबसे करीबी सहयोगियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त कर दिया जाए, तो उन्हें खुद ही पद छोड़ देना चाहिए। अगर मंत्री को इसकी जानकारी थी तो वे भी उतने ही दोषी हैं, और अगर वे कहें कि उन्हें पता नहीं था, तो यह अक्षमता और भी गंभीर है। यह उनके राजधर्म का पालन करने का समय है।” उन्होंने भाजपा को याद दिलाया कि इस राजधर्म में नैतिक जिम्मेदारी और राजनीतिक जवाबदेही दोनों शामिल हैं।

'चंदा दो, धंधा लो' को लेकर विपक्ष का तंज

इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार की 'चंदा दो, धंधा लो' वाली योजना में कोई गड़बड़ी हो गई है? उन्होंने लिखा कि बिना आग के इतना धुआं नहीं उठता। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस मामले को उठाते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि पर्यावरण मंत्रालय के इन रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ की गई इस अचानक और बड़ी कार्रवाई के पीछे के असली कारणों को देश के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।