भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, कार इंपोर्ट नियमों में बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली:भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, जिससे दोनों देशों के बीच कारोबार को एक नई गति मिलेगी. दोनों देशों के मध्य बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मध्य जुलाई से आधिकारिक रूप से प्रभावी होने जा रहा है. इस ऐतिहासिक कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अपनी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं और आयात से जुड़े नियमों तथा रियायतों की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है. इस नीतिगत निर्णय के बाद वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी हलचल देखी जा रही है.

ब्रिटेन की शानदार कारों का आयात होगा सस्ता, सीमा शुल्क में भारी कटौती

सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, समझौते के पहले ही वर्ष में यूनाइटेड किंगडम से आने वाली चुनिंदा प्रीमियम कारों पर लगने वाले आयात शुल्क में ऐतिहासिक रूप से बड़ी कटौती की गई है. अब बड़े और शक्तिशाली इंजन क्षमता वाले वाहनों को भारतीय बाजारों में लाने के लिए ऑटो कंपनियों को पहले के मुकाबले बेहद कम टैक्स चुकाना होगा. अलग-अलग इंजन क्षमता के आधार पर शुल्क की दरों को श्रेणीबद्ध किया गया है, जिसके तहत कुछ विशेष श्रेणी के वाहनों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तीन अंकों से घटाकर बेहद निचले स्तर पर ला दिया गया है. इस व्यवस्था से देश के वाहन शौकीनों को वैश्विक स्तर की लग्जरी कारें अब अधिक किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगी.

चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा कोटा, हाइब्रिड और ईवी के लिए भी खाका तैयार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस नए फॉर्मूले के तहत शुरुआत में रियायती दरों पर देश में आने वाले वाहनों की एक निश्चित संख्या तय की गई है. आगामी पांच वर्षों तक इस निर्धारित कोटे में सालाना आधार पर क्रमिक वृद्धि की जाएगी, जिसके बाद एक लंबी अवधि के रोडमैप के तहत इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा. इस दीर्घकालिक योजना का अंतिम लक्ष्य डेढ़ दशक के बाद आयात शुल्क को न्यूनतम स्तर पर समेटना है. इसके अलावा, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), हाइब्रिड और पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों के लिए विशेष व्यापारिक कोटा नीति के छठवें वर्ष से प्रभावी करने का निर्णय लिया गया है.

भारतीय निर्यातकों की चमकेगी किस्मत, गारमेंट्स और मरीन प्रोडक्ट्स पर टैक्स होगा शून्य

इस द्विपक्षीय समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय कपड़ा उद्योग, रसायन क्षेत्र और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यातकों को मिलने जा रहा है. अब तक ब्रिटेन के बाजारों में भारतीय कपड़ों, रसायनों और समुद्री उत्पादों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे भारतीय सामान ब्रिटिश बाजारों में काफी प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे. भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग निन्यानवे प्रतिशत सामानों को विभिन्न चरणों में पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया जाएगा. इस बड़ी राहत से भारतीय विनिर्माण और निर्यात सेक्टर को वैश्विक स्तर पर एक नया बाजार मिलेगा, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में आएगी गिरावट, जवाबी रियायतों से बढ़ेगा द्विपक्षीय व्यापार

इस समझौते के तहत भारत ने भी अपनी आयात नीतियों में लचीलापन दिखाते हुए ब्रिटेन से आने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम करने की सहमति दी है. ब्रिटेन से भारत आने वाले सामानों में सबसे प्रमुख स्कॉच व्हिस्की और मेड इन इंग्लैंड कारें हैं, जिन पर वर्तमान में भारत सरकार द्वारा भारी आयात शुल्क वसूला जाता है. नए नियमों के लागू होने के बाद, स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले डेढ़ सौ प्रतिशत के भारी शुल्क को किस्तों में घटाकर बेहद कम कर दिया जाएगा. इस पारस्परिक सहयोग नीति के तहत भारत भी ब्रिटेन के अधिकांश उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश के दौरान सीमा शुल्क में विशेष रियायतें प्रदान करेगा, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को समान रूप से लाभ होगा.