आतंक की जड़ काटेंगे, बोले विदेश मंत्री जयशंकर

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न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी अस्थायी सदस्यता की मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के आधिकारिक अभियान का शंखनाद करते हुए दुनिया के सामने देश का स्पष्ट विजन रखा। उन्होंने रेखांकित किया कि सुरक्षा परिषद में चुने जाने पर भारत आतंकवाद के खात्मे, सुरक्षित समुद्री व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक उपयोग को वैश्विक पटल पर मुख्य एजेंडा बनाएगा।

आतंकवाद की वित्तीय कमर तोड़ने पर विशेष जोर

विदेश मंत्री ने वैश्विक मंच से आह्वान किया कि दुनिया को अब आतंकवाद के केवल लक्षणों से लड़ने के बजाय उसकी मूल जड़ पर प्रहार करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का परमानेंट इलाज तभी मुमकिन है जब आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक और वित्तीय मदद को पूरी तरह ठप कर दिया जाए। भारत का लक्ष्य आतंकवाद के वित्तपोषण पर सख्त वैश्विक लगाम लगाना है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के लिए ठोस और साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कोई भी देश इसका राजनीतिकरण न कर सके।

वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए साझा प्रयास

सप्लाई चेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था की परस्पर निर्भरता का हवाला देते हुए जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित और निर्बाध रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालिया वैश्विक घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि समुद्री सुरक्षा में थोड़ी भी चूक पूरी दुनिया के व्यापार को ठप कर सकती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन होना बेहद जरूरी है। भारत समुद्री डकैती (पाइरेसी) जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करने का पक्षधर है।

हिंद महासागर में भारत की अग्रणी भूमिका

समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के अब तक के योगदान को साझा करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि देश लंबे समय से खोज एवं बचाव अभियानों, आपदा राहत और मानवीय सहायता में अग्रिम पंक्ति में रहा है। भारत का 'इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर' वर्तमान में पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में एक बेहतरीन सहयोगी नेटवर्क चला रहा है। भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सुरक्षा परिषद के भीतर समुद्री सुरक्षा के इन संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाए।

जिम्मेदार शासन के लिए भारत का 'MANAV' फ्रेमवर्क

उभरती हुई तकनीकों पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए जयशंकर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जहां विकास के नए द्वार खोल रही है, वहीं इसके अपने खतरे भी हैं। इसलिए तकनीकी विकास मानव-केंद्रित और जवाबदेह होना चाहिए। इस दिशा में भारत ने दुनिया के सामने MANAV फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है। इस विशेष रणनीति के तहत नैतिक व्यवस्था (Moral and Ethical), जवाबदेह शासन (Accountable Governance), राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान (National Sovereignty), सभी के लिए समावेशी पहुंच (Accessible and Inclusive) और एक वैध व विश्वसनीय प्रणाली (Valid and Legitimate) सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।