भट्टी बना लोकल ट्रेन का डिब्बा, मची अफरा-तफरी

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मुंबई: मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन में सोमवार को यात्रियों को एक बेहद डरावने अनुभव से गुजरना पड़ा। टिटवाला से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) जा रही एक एसी लोकल ट्रेन का एयर-कंडीशनिंग सिस्टम अचानक ठप हो गया, जिससे खचाखच भरा डिब्बा देखते ही देखते गर्म भट्टी में तब्दील हो गया। हवा न मिलने और भीषण उमस के कारण डिब्बे में मौजूद महिलाओं समेत कई यात्रियों का दम घुटने लगा और वे बेहाल होने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंततः ट्रेन को मुलुंड से कुर्ला के बीच करीब 15 किलोमीटर तक दोनों तरफ के दरवाजे खोलकर चलाना पड़ा ताकि यात्रियों को सांस लेने के लिए हवा मिल सके।

सफर बना आफत, यात्री को ले जाना पड़ा अस्पताल

सेंट्रल रेलवे के अनुसार, सुबह करीब 8:33 बजे यात्रा के दौरान यह तकनीकी खराबी आई। ट्रेन के भीतर हवा का प्रवाह बंद होने से जब यात्रियों की तबीयत बिगड़ने लगी, तो ट्रेन को सुबह 9:38 बजे मुलुंड स्टेशन पर आपातकालीन स्थिति में रोकना पड़ा। इस दौरान दम घुटने से कई महिला यात्री अचेत होने लगीं, जबकि 43 वर्षीय यात्री फहीम अंसारी की हालत अधिक बिगड़ने पर उन्हें तत्काल मुलुंड वेस्ट के एमटी अग्रवाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने के बाद अंसारी को सुबह साढ़े ग्यारह बजे छुट्टी दी गई, जबकि अन्य प्रभावित यात्रियों को स्टेशन पर ही पानी और प्राथमिक चिकित्सा दी गई।

भीड़ के कारण बेअसर रहे सुरक्षा इंतजाम, रेलवे ने बैठाई जांच

रेलवे प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। सेंट्रल रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि नियमानुसार मुख्य एसी यूनिट फेल होने पर बगल वाली बैकअप यूनिट को खुद-ब-खुद काम करना शुरू कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसकी तकनीकी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा, सोमवार की सुबह होने के कारण कोच में यात्रियों की इतनी अत्यधिक भीड़ थी कि ट्रेन में मौजूद रेलवे का तकनीशियन चाहकर भी समय रहते एसी रीसेट स्विच तक नहीं पहुंच सका। अब इस पूरे घटनाक्रम और तकनीकी विफलता की बारीकी से जांच की जा रही है।

हेल्पलाइन रही खामोश, यात्रियों ने खुद संभाला मोर्चा

सफर कर रहे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दीवा स्टेशन पार करते ही एसी ने काम करना बंद कर दिया था। डिब्बे में सफोकेशन बढ़ने पर घबराए यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन पर 15 से अधिक बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। मुलुंड स्टेशन पहुंचते-पहुंचते जब हालात बेकाबू हो गए, तो यात्रियों ने हंगामा करते हुए ट्रेन को रुकवा दिया और आगे बढ़ने से मना कर दिया। यात्रियों ने ताजी हवा के प्रवाह के लिए खुद ही दरवाजों को खुला रखा, जिसके बाद प्रशासन को मुलुंड से कुर्ला तक का 15 किलोमीटर का सफर मजबूरी में खुले दरवाजों के साथ ही तय करना पड़ा।