स्पीकर के फैसले से बदलेगा सियासी समीकरण, TMC के बागी सांसदों को नई सीटें

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नई दिल्ली। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा के भीतर राजनीतिक और बैठने का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जल्द ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को सदन में नई सीटें आवंटित कर सकते हैं। इन सांसदों ने खुद को मूल पार्टी से अलग करते हुए 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय का दावा किया है। इस नए गुट की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में NCPI का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया जा सकता है। दस्तीदार के मुताबिक, स्पीकर ने उन्हें नई सीटें, संसद भवन में कार्यालय और 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आश्वासन दिया है।

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में दोफाड़

यह पूरा सियासी घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद शुरू हुआ। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी विधानसभा और संसद दोनों जगह दो धड़ों में बंट गई।

  • विधानसभा: टीएमसी के टिकट पर जीते 60 विधायकों ने अपना एक अलग गुट बना लिया है।

  • लोकसभा: निचले सदन में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए NCPI में विलय का दावा किया और खुद को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जोड़ लिया।

  • राज्यसभा: उच्च सदन में भी टीएमसी के तीन सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

NDA की बढ़ेगी ताकत, NCPI बनेगी सबसे बड़ी सहयोगी

सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई से पहले स्पीकर ओम बिरला इस लंबित विलय पर अपना आधिकारिक फैसला सुना सकते हैं। यदि इस विलय को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है, तो सदन में अब तक शून्य सीट वाली NCPI एकाएक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बनकर उभरेगी। इस फेरबदल से लोकसभा में एनडीए (NDA) का आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगा, हालांकि किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए गठबंधन को अब भी करीब 40 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत बनी रहेगी।

शिवसेना (UBT) ने खड़ा किया कानूनी मोड़

जहां एक तरफ टीएमसी के बागी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे ने इसे कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर ली है। शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने इस तरह के विलय पर गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी ही पार्टी के छह बागी सांसदों का उदाहरण देते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत सांसदों का कोई भी समूह स्वतंत्र रूप से किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता, जब तक कि मूल राजनीतिक दल इसके लिए अपनी आधिकारिक सहमति न दे। इस संबंध में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक विरोध पत्र भी सौंपा है।