पटना। बिहार की राजधानी में इस्कॉन मंदिर के तत्वावधान में आयोजित भगवान जगन्नाथ की भव्य एवं अलौकिक रथयात्रा ने पूरे महानगर को पूरी तरह भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। 40 फीट ऊंचे आधुनिक हाइड्रोलिक रथ पर सुभद्रा जी और बलभद्र जी के साथ विराजमान महाप्रभु के दर्शन पाने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे शहर में अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया।
महाभोग और विशेष अनुष्ठान के साथ हुआ भव्य धार्मिक उत्सव का शंखनाद
इस पावन उत्सव का शुभारंभ दोपहर ठीक एक बजे भगवान के विशेष पूजन, महाआरती और 151 प्रकार के व्यंजनों के भव्य महाभोग अर्पण के साथ हुआ। इसके बाद दोपहर करीब ढाई बजे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्य रूप से उपस्थित होकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र रथ को अपने हाथों से खींचकर इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत की।
कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों और जयकारों से गूंज उठा पूरा मार्ग
रथयात्रा जैसे-जैसे अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे भक्तों का उत्साह चरम पर पहुँचता गया। रथ के आगे-आगे चल रही कीर्तन मंडलियों के भक्ति गीतों और वाद्य यंत्रों की मधुर स्वर लहरियों ने समां बांध दिया। पूरे यात्रा मार्ग में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं ने गगनभेदी जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरे वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक और दिव्य बना दिया।
धार्मिक आयोजन के महामंच पर दिखा सियासत और अटूट श्रद्धा का अनूठा संगम
महाप्रभु की इस पावन रथयात्रा में इस बार आस्था और राजनीतिक जगत का एक अद्भुत समन्वय देखने को मिला। राज्य के उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी, खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और कला-संस्कृति मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी सहित शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों ने इस भव्य आयोजन में हिस्सा लिया। सभी जनप्रतिनिधियों ने भगवान जगन्नाथ के चरणों में शीश नवाकर राज्य की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
सुरक्षा के कड़े प्रबंधों के बीच देर शाम इस्कॉन मंदिर में संपन्न हुई यात्रा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए थे। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह रथयात्रा का पुष्प वर्षा और तोरण द्वारों से भव्य स्वागत किया गया। पूरे नगर का भ्रमण करने के बाद यह पावन रथयात्रा देर शाम शांतिपूर्वक और हर्षोल्लास के साथ पुनः इस्कॉन मंदिर परिसर पहुँचकर संपन्न हुई।









