आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार, 15 जुलाई 2026 से विशेष शुभ संयोग के साथ हो गया है. हिंदू धर्म में शारदीय और चैत्र नवरात्रि की तरह ही गुप्त नवरात्रि का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. हालांकि यह नवरात्रि सामान्य भक्तों की अपेक्षा तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और दस महाविद्याओं की उपासना करने वाले साधकों के लिए विशेष मानी जाती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होने की मान्यता है. लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि साधना के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन नहीं किया जाए तो इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता.
कि गुप्त नवरात्रि की साधना सामान्य पूजा-पाठ से अलग होती है. इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण नियम गोपनीयता का है. यदि कोई साधक विशेष मंत्र जाप, अनुष्ठान या तांत्रिक साधना कर रहा है तो उसकी जानकारी अपने गुरु के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए. साधना जितनी गुप्त और एकाग्र होकर की जाती है, उसके सफल होने की संभावना उतनी ही अधिक मानी जाती है.
साधना करने से मन एकाग्र नहीं हो पाता
उन्होंने बताया कि साधना का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. पूजा या अनुष्ठान ऐसे स्थान पर करना चाहिए जहां शांति हो, लोगों का आवागमन कम हो और वातावरण पूरी तरह पवित्र हो. बार-बार व्यवधान आने या शोर-शराबे वाले स्थान पर साधना करने से मन एकाग्र नहीं हो पाता और साधना का प्रभाव कम हो सकता है.
ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवन का रखें विशेष ध्यान
पंडित शर्मा के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में साधकों को ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया है. यथासंभव जमीन पर विश्राम करें, सात्विक भोजन ग्रहण करें तथा क्रोध, झूठ, निंदा और विवाद से दूर रहें. किसी की बुराई करने के साथ-साथ अनावश्यक प्रशंसा से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे मन भटक सकता है.
उन्होंने कहा कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए. साथ ही मोबाइल, सोशल मीडिया, टेलीविजन और अन्य ऐसे साधनों से दूरी बनाए रखें, जो साधना में एकाग्रता भंग करते हों. श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक की गई आराधना से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति तथा मनचाहे फल की प्राप्ति होने की मान्यता है.









