नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांगों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के कड़े रुख ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ हुई बंद कमरे की बैठक ने मानसून सत्र में किसी बड़ी राजनीतिक हलचल के संकेत दिए हैं।
रणनीति बनाने के लिए राहुल-अखिलेश की गहन मंत्रणा
विपक्ष के नेता के कक्ष में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार को घेरने की साझा रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करना है। दोनों नेताओं ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आगामी सत्र के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों पर एकजुट रहे और जनता से जुड़े इन विषयों को सदन में पुरजोर तरीके से उठाया जाए।
विपक्ष की एकजुटता और मजबूत होती सपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बढ़ती मजबूती और सरकार के प्रति उनके आक्रामक तेवरों को बखूबी समझ रहे हैं। मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष के कड़े तेवरों के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है, जो सरकार के लिए चुनौती बन गई है। राहुल गांधी का समाजवादी पार्टी पर बढ़ता फोकस इस बात का संकेत है कि 'इंडिया' गठबंधन के भीतर अब एक ठोस और साझा रणनीति के तहत काम करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा सके।
सरकार को घेरने का साझा एजेंडा
विपक्ष की कोशिश है कि राम मंदिर चंदा चोरी विवाद और भर्ती परीक्षाओं में धांधली जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को संसद के भीतर कोई भी ढिलाई न बरतने दी जाए। दोनों दलों के नेता इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि यदि गठबंधन के सभी सहयोगी दल एकजुट होकर मुद्दों को उठाएंगे, तो सरकार पर दबाव बनाना आसान होगा। संसद के मानसून सत्र में अब विपक्ष का स्पष्ट लक्ष्य केवल हंगामे तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की विफलताओं को प्रमाणित करते हुए जनता के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करना है, जिसके लिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव की यह बैठक एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।









