राजस्थान में जल संकट गहराया, 279 बांध सूखे; सिर्फ 5 पूरी तरह भरे

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कोटा:राजस्थान के हाड़ौती अंचल में इस बार मानसून की बेरुखी ने कृषि क्षेत्र और ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी बादलों के मेहरबान न होने से किसान खासे मायूस हैं। कोटा संभाग में खरीफ फसलों का एक बड़ा रकबा अब भी खाली पड़ा हुआ है। समय तेजी से बीतने के कारण सोयाबीन और धान जैसी मुख्य फसलों की बुवाई पर संकट गहरा गया है। बारिश न होने के कारण जल संसाधन विभाग और किसान दोनों ही टकटकी बांधे आसमान की ओर देख रहे हैं।

चंबल नदी के बांधों में जलस्तर की स्थिति चिंताजनक

बारिश न होने का सीधा असर हाड़ौती के प्रमुख जल स्रोतों पर पड़ा है। ईआरसीपी योजना के तहत बने नौनेरा बैराज की कुल भराव क्षमता 52 फीट है, लेकिन वर्तमान में इसमें महज 0.65 फीट पानी ही उपलब्ध है। इसके अलावा कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणा प्रताप सागर बांधों में भी गत वर्ष की तुलना में जलस्तर काफी नीचे चला गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि अगले कुछ दिनों में तेज बारिश नहीं हुई तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के पानी पर टिकी निर्भरता

मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक जवाहर सागर बांध में करीब 72.99 प्रतिशत और राणा प्रताप सागर में 66.86 प्रतिशत जल उपलब्ध है। वहीं छोटे जलाशयों की बात करें तो आलनिया बांध में 33 फीट क्षमता के मुकाबले 15 फीट और सावन भादो बांध में 42 फीट के बदले केवल 11.80 फीट पानी ही शेष बचा है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील गुप्ता के अनुसार मानसून की सुस्ती से पानी की आवक बेहद कम रही है और फिलहाल सिंचाई की जरूरतों के लिए मध्य प्रदेश से मिलने वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

प्रदेश भर के जलाशयों में घटता जल संचय

पूरे राजस्थान के जल परिदृश्य पर नजर डालें तो कुल 693 बांधों में से केवल 5 बांध ही लबालब हो सके हैं, जबकि 279 बांध पूरी तरह सूखे पड़े हैं। शेष 409 बांधों में भी बेहद सीमित मात्रा में पानी बचा है। राज्य के कुल बांधों में भराव क्षमता का महज 45.76 प्रतिशत जल ही उपलब्ध है, जो पिछले साल इसी अवधि में 57.81 प्रतिशत था। कोटा क्षेत्र के 81 बांधों में भी पानी का स्तर बीते वर्ष के 79.36 प्रतिशत से घटकर इस बार 56.62 प्रतिशत पर आ गया है।

कृषि संकट से बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंका

हाड़ौती का अन्नदाता अब पूरी तरह मानसून की सक्रियता पर निर्भर है। यदि जल्द ही अच्छी वर्षा नहीं होती है तो इसका असर सिर्फ खरीफ की फसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में खाद्यान्न और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। बाजार में सब्जियों के दाम अभी से चढ़ने लगे हैं, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।