‘आवाज बिल्कुल सामान्य थी’… नीरज मर्डर केस में भाई ने किया चौंकाने वाला खुलासा

0
12

जयपुर: नीरज हत्याकांड में हर बीतते दिन के साथ चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। इस पूरे मामले में मृतक के भाई राकेश शर्मा ने दावा किया है कि घटना की पहली सूचना मिलते ही उन्हें अनहोनी का आभास हो गया था। उनका स्पष्ट कहना है कि यह कोई सामान्य सड़क हादसा नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित तरीके से रची गई हत्या की साजिश है। शुरुआत से ही सामने आए कई तथ्यों ने एक्सीडेंट की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहली ही कॉल से गहराया शक और पारिवारिक विवाद

घटना के तुरंत बाद राकेश को आयुषी की ओर से एक फोन आया था, जिसमें सिर्फ इतना कहा गया कि मां का एक्सीडेंट हो गया है और उनकी जान चली गई है। इतनी बड़ी त्रासदी की खबर देने के बावजूद आयुषी की आवाज में न तो कोई घबराहट थी और न ही रोने जैसी स्वाभाविक भावनात्मक प्रतिक्रिया। इसके बाद उसकी तरफ से दोबारा कोई संपर्क भी नहीं किया गया, जिसने सबसे पहले मन में संदेह पैदा किया। इसके अलावा, परिवार में पहले से ही संपत्ति और अहम दस्तावेजों को लेकर तनाव चल रहा था। आयुषी पर जरूरी कागजात और नकदी साथ ले जाने के आरोप थे, वहीं पिता की मृत्यु के बाद मिलने वाले जीपीएफ, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर अकेले हक जताने के लिए अदालतों में याचिकाएं भी लगाई गई थीं।

नए संपर्क के बाद बदला व्यवहार और संदिग्ध गतिविधियां

दिसंबर 2024 के बाद बलराम नामक व्यक्ति के संपर्क में आने से आयुषी के चाल-चलन और फैसलों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। वह पूरी तरह उसी के प्रभाव में काम करने लगी और परिवार से उसकी दूरियां लगातार बढ़ती गईं। केवल इतना ही नहीं, नीरज के पति की मृत्यु के बाद उनका मोबाइल, सिम कार्ड और निजी सामान भी कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिया गया था। नियमों को ताक पर रखकर मोबाइल नंबर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने की बात भी सामने आई है। इन तमाम संदिग्ध कड़ियों को जोड़ने पर साफ नजर आता है कि यह हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी आपराधिक साजिश का हिस्सा था।

जयपुर में हुए इस पूरे घटनाक्रम का सच

पूरा मामला बीते 4 जुलाई की शाम का है, जब जयपुर के प्रताप नगर इलाके में एक बेकाबू स्कॉर्पियो की टक्कर से 45 वर्षीय नीरज शर्मा की मौत हो गई थी। मृतका के भाई ने शुरुआत में ही हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या का अंदेशा जताया और केस दर्ज कराया। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो एक खौफनाक सच बाहर आया कि दुर्घटना को केवल एक मुखौटे की तरह इस्तेमाल किया गया था। इस जघन्य हत्याकांड के सिलसिले में पुलिस सात आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता आयुषी का चचेरा भाई बलराम उर्फ रवि अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।