मध्य प्रदेश में जीवनरक्षक कानून लागू, शहर-गांव के लिए तय हुई गोल्डन टाइम सीमा

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भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार, 21 जुलाई को वर्षों से लंबित अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक (फायर सेफ्टी एक्ट) को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सदन में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि विभिन्न राज्यों और केंद्र के कानूनों का गहन अध्ययन करने के उपरांत यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है। साढ़े पांच घंटे चली विस्तृत चर्चा के बाद फायर सेफ्टी बिल के साथ-साथ राजमार्ग संशोधन, मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता और यूसीसी समेत कुल आठ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

आपातकालीन सेवा का दर्जा और सख्त जवाबदेही तय

विधेयक के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अब दमकल सेवाओं को अत्यावश्यक सेवा घोषित किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान और पृथक संचालनालय का गठन होगा। यदि किसी स्थान पर अग्निकांड होता है और जांच में सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी पाई जाती है, तो भवन स्वामी के साथ-साथ संबंधित प्रशासनिक अधिकारी की भी सीधी जवाबदेही तय होगी।

15 मीटर ऊंची इमारतों के लिए एनओसी अनिवार्य, त्वरित रिस्पांस टाइम

नए कानून के लागू होने से राज्य में दमकल गाड़ियों और फायर स्टेशनों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे शहरों में 10 मिनट और ग्रामीण अंचलों में 20 मिनट के भीतर सहायता पहुंच सके। 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। इस कानून का मुख्य ध्येय केवल आग बुझाना ही नहीं, बल्कि ऐसी दुर्घटनाओं को होने से रोकना है।

पंडालों और स्कूलों के लिए कड़े नियम, झूठी सूचना पर जुर्माना

विधेयक के समर्थन में जबलपुर (उत्तर) के विधायक अभिलाष पांडे ने बताया कि अब बड़े आयोजनों और पंडालों के लिए भी अग्नि सुरक्षा की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एनओसी के नए मानक तय किए गए हैं। कानून में आपातकालीन स्थितियों में स्वयंसेवकों की मदद लेने का प्रावधान है, वहीं आग लगने की अफवाह या गलत सूचना देने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने का नियम भी जोड़ा गया है।