इंदौर में SMC इन्फ्रा एस्टेट पर बड़ी कार्रवाई, करोड़ों नहीं 55.80 लाख की ठगी के आरोप में केस दर्ज

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देपालपुर:शहर की प्रसिद्ध गीता विहार कॉलोनी में बंधक (मॉर्टगेज) रखे गए प्लॉटों को अवैध रूप से बेचकर आम खरीदारों के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एस.एम.सी. इन्फ्रा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, आम मुख्त्यारधारी और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। जांच में पाया गया कि डेवलपर्स ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर शासन के पास सुरक्षित रखी गई जमीनों की रजिस्ट्री कर दी।

बंधक संपत्तियों को अवैध तरीके से बेचकर 55 लाख से अधिक की चपत लगाई

EOW की विस्तृत जांच में यह बात उजागर हुई है कि कॉलोनी में विकास कार्य पूरे करने की शर्त पर ग्राम ताजखेड़ी स्थित प्लॉट संख्या 88, 89, 90 और 124 को नियमानुसार कॉलोनी सेल के पास बंधक रखा गया था। इसके बावजूद, कंपनी के प्रबंधकों ने धोखाधड़ी की नीयत से मार्च और मई 2018 के दौरान इन चारों बंधक प्लॉटों का सौदा कर दिया और खरीदारों से लगभग 55.80 लाख रुपये वसूल लिए। जांच अधिकारियों के अनुसार, जिस समय यह बिक्री की गई, उस समय विक्रेताओं के पास इन संपत्तियों को हस्तांतरित करने या बेचने का कोई वैध कानूनी अधिकार नहीं था।

फर्जी प्रमाण-पत्रों के जरिए रेरा को गुमराह करने का गंभीर आरोप

इस पूरे मामले का खुलासा भ्रष्टाचार विरोधी संगठन के सचिव एस. शिवम की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया था कि डेवलपर्स ने कॉलोनी का बुनियादी ढांचा तैयार किए बिना ही फर्जी इंजीनियरिंग सर्टिफिकेट तैयार करवाए और उन्हें रेरा (RERA) के समक्ष पेश कर दिया। झूठे कागजातों के आधार पर कागजी खानापूर्ति करके सरकारी नियंत्रण वाले बंधक प्लॉटों को भी बाजार में बेच दिया गया और सीधे-साधे प्लॉट खरीदारों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया।

अधूरे विकास कार्यों के बीच मुख्त्यारनामा बनाकर बेची गई जमीनें

प्राथमिक जांच रिपोर्ट से पता चला है कि कॉलोनी में केवल 70 प्रतिशत ही विकास कार्य पूरे हो पाए थे। हालांकि बाउंड्रीवाल, सड़कें, ड्रेनेज, वाटर सप्लाई लाइन, ओवरहेड टैंक और पार्क जैसी सुविधाएं तो बना दी गई थीं, लेकिन बिजली तंत्र से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण काम अब भी अधूरे पड़े हैं। इसी बीच, कंपनी के मुख्य निदेशक सुरेश ठाकुर ने 22 दिसंबर 2017 को 35 प्लॉटों का पावर ऑफ अटॉर्नी (आम मुख्त्यारनामा) दिनेश मुकाती के नाम निष्पादित किया था, जिसके आड़ में बंधक रखी गई इन कीमती संपत्तियों की अवैध रूप से रजिस्ट्री करवा दी गई।

सरकारी रिकॉर्ड में अब भी बंधक हैं प्लॉट, धाराओं में केस दर्ज

संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी अधिकारी, कॉलोनी सेल से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संबंधित चारों प्लॉट आज भी सरकारी रिकॉर्ड में बंधक ही दर्ज हैं और इन्हें कभी भी मुक्त (रिलीज) नहीं किया गया था। बिना नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के ही इन जमीनों की रजिस्ट्री कर दी गई। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर EOW ने प्रथम दृष्टया संगठित धोखाधड़ी मानते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 और 34 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।