जयपुर:राजस्थान में पंचायती राज और नगरीय निकायों के लंबित चुनावों को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव कराने में हो रही देरी के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी राजनीतिक आरक्षण आयोग को स्पष्ट समय-सीमा में काम पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अब चुनाव प्रक्रिया को टालने का कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि आगे विलंब हुआ तो संबंधित उच्च अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
ओबीसी आरक्षण आयोग को 5 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने की अंतिम मोहलत
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर सख्त नाराजगी जताई कि राजनीतिक आरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने में आयोग पहले ही काफी समय गंवा चुका है। पीठ ने आदेश दिया कि ओबीसी आयोग हर हाल में 5 अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दे और इस तय तारीख में किसी भी स्थिति में कोई अतिरिक्त छूट या विस्तार नहीं दिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग 15 अगस्त तक घोषित करे चुनाव कार्यक्रम, लॉटरी प्रक्रिया तुरंत हो पूरी
उच्च न्यायालय ने आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लॉटरी निकालने का कार्य संपन्न करने के लिए एक सप्ताह से आठ दिन का समय पूरी तरह से पर्याप्त होता है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आरक्षण प्रक्रिया को शीघ्र अति शीघ्र निपटाए ताकि राज्य निर्वाचन आयोग 15 अगस्त तक चुनाव की तिथियों का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित कर सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव लंबे समय तक अधर में नहीं लटकाए जा सकते।
रिपोर्ट मिलने में देरी होने पर भी नहीं रोकी जाएगी चुनावी प्रक्रिया
अदालत ने सुनवाई के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश 5 अगस्त की तय तिथि तक ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर पाता है, तब भी चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में भी सरकार और निर्वाचन आयोग बिना किसी रुकावट के आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया को पूरा करेंगे ताकि चुनावी कैलेंडर प्रभावित न हो। उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी रिपोर्ट के इंतजार में निकाय और पंचायत चुनाव की तिथियों को आगे नहीं खिसकाया जा सकेगा।
15 नवंबर तक पूरी तरह संपन्न होंगे चुनाव, अवमानना याचिकाओं का हुआ निस्तारण
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई समयबद्ध कार्ययोजना को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को 15 नवंबर तक अनिवार्य रूप से संपन्न कराने का आदेश जारी किया है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि तय समय-सीमा के भीतर ही आरक्षण की व्यवस्था और मतदान की सारी प्रक्रियाएं संपन्न करा ली जाएंगी। इन सभी दिशा-निर्देशों और सरकार के हलफनामे को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने संबंधित अवमानना याचिकाओं और लंबित आवेदनों को पूरी तरह से निस्तारित कर मामला बंद कर दिया है।









