3 घंटे के ऑपरेशन के बाद मिली सफलता, जुड़े जुड़वा नवजात हुए अलग

0
6

जबलपुर। शहर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा जगत की एक बेहद अनूठी और जटिल घटना सामने आई है, जहां जन्म से आपस में जुड़े दो जुड़वां नवजात शिशुओं की पहले चरण की सर्जरी को डॉक्टरों की टीम ने पूरी सफलता के साथ अंजाम दिया है। इस अत्यंत दुर्लभ और पेचीदे मामले को चिकित्सा विज्ञान में लाखों में एक माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अस्पताल के चौदह विशेषज्ञ चिकित्सकों की दो विशेष टीमों का गठन किया गया था। फिलहाल, सर्जरी के बाद दोनों मासूमों को डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में सुरक्षित रखा गया है।

नरसिंहपुर से रेफर होकर पहुंचे थे दुर्लभ मामले के बच्चे

चिकित्सक दल के अनुसार, ये दोनों जुड़वा बच्चे नरसिंहपुर जिले से गंभीर हालत में रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। जन्म के समय से ही दोनों बच्चों के शरीर कमर वाले हिस्से से आपस में जुड़े हुए थे। डॉक्टरों का कहना था कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उन्हें एक सामान्य जीवन देने के लिए उनके शरीर के इन जुड़े हुए अंगों को अलग करना अत्यंत आवश्यक था। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के कुशल सर्जनों ने इस बेहद जोखिम भरे पहले चरण के ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

तीन घंटे तक चली लंबी और जटिल प्रक्रिया

यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक लगातार चला, जिसमें डॉक्टरों ने दोनों नवजात बच्चों को अभी पूरी तरह से अलग नहीं किया है, बल्कि उनके शरीर के अंदरूनी हिस्सों जैसे मल त्याग की नली यानी रेक्टम और एनस को सफलतापूर्वक अलग करने का कार्य किया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों शिशुओं को पूरी तरह से अलग करने की यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसके लिए आने वाले समय में ऐसे कई अन्य चरणों में भी ऑपरेशन करने पड़ेंगे।

संक्रमण और हृदय संबंधी विकारों पर विशेष नजर

ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों का यह भी कहना है कि इनमें से एक बच्चे, जीवान को संक्रमण की समस्या कुछ अधिक है, जिसके चलते किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जा रही है। इसके अलावा, हृदय से संबंधित किसी भी संभावित विकार की आशंका को दूर करने के लिए लगातार सभी आवश्यक मेडिकल जांचें की जा रही हैं। चूंकि ऐसे जुड़े हुए बच्चों के अंगों का पुनर्निर्माण एक लंबी प्रक्रिया होती है और एक की सेहत में उतार-चढ़ाव का असर दूसरे पर भी पड़ सकता है, इसलिए दोनों को एनआईसीयू के अंदर चौबीसों घंटे की कड़ी निगरानी में रखा गया है।

ऑपरेशन थिएटर में किए गए थे हाई-टेक इंतजाम

इस ऐतिहासिक और जटिल सर्जरी की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन थिएटर के भीतर पुख्ता और विशेष प्रबंध किए गए थे। चूंकि दोनों नवजात शरीर से जुड़े हैं लेकिन उनके ज्यादातर अंग स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं, इसलिए ओटी के अंदर जीवन रक्षक प्रणाली का पूरा दोहरा सेटअप तैयार किया गया था। एहतियात के तौर पर दो अलग-अलग सर्जिकल टीमों के साथ-साथ दो एनेस्थीसिया टीमें, दो मशीनें, दो वेंटिलेटर, दो मॉनिटर सिस्टम और अन्य सभी आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों के दो-दो सेट पूरी तरह से तैयार रखे गए थे।