कंप्यूटर आधारित NEET की तैयारी? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दिए बड़े संकेत

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा (Multi-layered Security System) तैयार किया गया है। इसके साथ ही, नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

परीक्षा सुधारों के लिए दो प्रमुख कदम

  • नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स: इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (HPTF) परीक्षा प्रणाली में एंड-टू-एंड सुधारों, उन्नत तकनीक के उपयोग और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने के लिए तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपेगी।

  • कड़ा कानून: पेपर लीक, फर्जीवाड़े और कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ को रोकने के लिए 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026' लागू किया गया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।

फुलप्रूफ सुरक्षा और '6-लेयर टैम्पर-प्रूफ' पैकेजिंग

डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सुझावों के आधार पर प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर परिणाम घोषित करने तक नया सुरक्षा डिजाइन तैयार किया गया है। प्रश्न-पत्रों के बक्सों के लिए 6-स्तरीय टैम्पर-प्रूफ पैकेजिंग और क्यूआर व आधार आधारित डिजिटल ट्रैकिंग का उपयोग किया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए 51,000 से अधिक जैमर, 1.38 लाख सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक सत्यापन और फ्रिस्किंग के लिए हजारों कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया है।

स्थाई व्यवस्था और कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट पर मंथन

केंद्र ने बताया कि एनटीए के भीतर एक स्थाई 'कॉन्फिडेंशियल-ऑपरेशंस वर्टिकल' और टेक्निकल मैनुअल तैयार किया जा रहा है, ताकि स्टाफ बदलने के बावजूद संस्थागत अनुभव (Institutional Memory) सुरक्षित रहे। इसके अतिरिक्त, जेईई (JEE Main), सीयूईटी (CUET) और यूजीसी-नेट की तर्ज पर नीट-यूजी को भी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (सिंगल या टू-स्टेज मॉडल) में बदलने पर हितधारकों द्वारा सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है, जिस पर अंतिम निर्णय नीलेकणि समिति की सिफारिशों के बाद लिया जाएगा।