US में जन्मसिद्ध नागरिकता पर सख्ती, ट्रंप ने ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ उठाया बड़ा कदम

0
9

वाशिंगटन| संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता के प्रावधानों को सीमित करने और 'बर्थ टूरिज्म' (जन्म पर्यटन) पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से गुरुवार को दो महत्वपूर्ण नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन का यह कड़ा कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इसके ठीक कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप के पिछले आदेश को खारिज कर दिया था।

पहला आदेश: 'बर्थ टूरिज्म' पर कड़ा प्रहार

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित किए गए पहले कार्यकारी आदेश का मुख्य फोकस उन लोगों पर नकेल कसना है, जो केवल अपने बच्चे को अमेरिकी धरती पर जन्म दिलवाने के इरादे से विशेष रूप से अमेरिका की यात्रा करते हैं, जिसे आमतौर पर 'बर्थ टूरिज्म' कहा जाता है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ऐसे लोग अक्सर टूरिस्ट (पर्यटन) वीजा का दुरुपयोग करते हैं, जबकि उनका असली और छिपा हुआ मकसद बच्चे को अमेरिकी धरती पर जन्म दिलाकर उसे वहां की जन्मसिद्ध नागरिकता दिलाना होता है।

दूसरा आदेश: नागरिकता के लिए अयोग्य श्रेणियों का विस्तार

जारी किए गए दूसरे कार्यकारी आदेश के तहत उन लोगों की श्रेणियों के दायरे को काफी बढ़ा दिया गया है, जिनके बच्चों को अब जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए पूरी तरह अयोग्य माना जाएगा। इस नई श्रेणी में मुख्य रूप से विदेशी सरकारों के लिए कार्यरत कर्मचारियों, उनकी ओर से आधिकारिक लॉबिंग करने वाले व्यक्तियों के बच्चों सहित कुछ अन्य चुनिंदा श्रेणियां शामिल की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले खारिज किया जा चुका है पुराना आदेश

बीते 30 जून को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के पहले वाले कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया था। उस दौरान अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि पिछले 100 वर्षों से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, अमेरिका की भौगोलिक सीमा के भीतर जन्म लेने वाले लगभग हर व्यक्ति को स्वतः अमेरिकी नागरिकता का अधिकार प्राप्त है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवल ऑफिस में नए आदेशों पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का वह पुराना फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था, और इसीलिए उनकी सरकार अब उसमें कानूनी रूप से आवश्यक बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा, 'जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत निराशाजनक था, इसलिए हम अपनी नीति में जरूरी संशोधन कर रहे हैं।'

क्या कहता है अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन?

अमेरिकी संविधान का ऐतिहासिक 14वां संशोधन, जिसे 9 जुलाई 1868 को लागू किया गया था, यह प्रावधान करता है कि अमेरिका की सीमा में जन्म लेने वाले या वहां की नागरिकता प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देश का आधिकारिक नागरिक माना जाएगा। यह कानून मूल रूप से अमेरिकी गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद पूर्व गुलामों को नागरिकता प्रदान करने के लिए लाया गया था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का यह तर्क है कि वह कानून उस दौर की खास परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से बनाया गया था, लेकिन मौजूदा समय में कुछ लोग इसका अनुचित लाभ उठाकर 'बर्थ टूरिज्म' का बड़ा व्यवसाय चला रहे हैं।

व्हाइट हाउस का आधिकारिक तर्क

व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने इस पूरे मामले पर पक्ष रखते हुए कहा है कि दुनिया भर से कई लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं, लेकिन उनकी वास्तविक मंशा अपने बच्चे को अमेरिकी जमीन पर जन्म दिलाने की होती है ताकि उसे जन्म से ही नागरिकता मिल सके। उनके अनुसार, इस तरह की व्यवस्था के जरिए ऐसे परिवारों को भविष्य में अमेरिकी सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, अनन्य सुविधाओं और महत्वपूर्ण नागरिक अधिकारों तक आसान पहुंच मिल जाती है।

नए आदेश से किन लोगों के बच्चों पर पड़ेगा असर?

नए शासकीय आदेशों के अनुसार, विशेष श्रेणियों से जुड़े लोगों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता या उससे जुड़े आधिकारिक दस्तावेज जारी करने पर रोक लगाई जाएगी, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • 'बर्थ टूरिज्म' के अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचने वाले विदेशी नागरिकों के नवजात बच्चे।

  • अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की संतानें।

  • विभिन्न विदेशी सरकारों के अधीन कार्य करने वाले कर्मचारियों के बच्चे।

  • कुछ विशेष अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे, जिन पर संघीय कानूनों के तहत स्वतः नागरिकता का नियम लागू नहीं होता।

कानूनी विशेषज्ञों ने बताया असंवैधानिक

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय आव्रजन कानून के कई जाने-माने विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन नए आदेशों का खुला विरोध किया है। न्यूयॉर्क शहर के प्रमुख इमिग्रेशन वकील साइरस मेहता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह नया आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के मूल भाव का सीधा उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें इस्तेमाल की गई 'व्यावसायिक लेन-देन' जैसी परिभाषाएं बहुत अस्पष्ट हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में अदालतों में आसानी से चुनौती दी जा सकती है। इसके अलावा, 'अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन' (ACLU) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह साफ कर चुका है कि जन्मसिद्ध नागरिकता देश के संविधान द्वारा सुरक्षित एक मौलिक अधिकार है, इसलिए ट्रंप का यह नया आदेश भी कानूनी कसौटी पर टिक पाना बेहद मुश्किल होगा।

आंकड़े क्या बयां करते हैं?

'माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के अनुमान के मुताबिक, हर साल संयुक्त राज्य अमेरिका में 'बर्थ टूरिज्म' के माध्यम से लगभग 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म होता है। वहीं, दूसरी ओर आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले वर्ष 2024 के दौरान विदेशी पते वाली माताओं से जन्मे कुल 9,600 बच्चों का पंजीकरण अमेरिका में दर्ज किया गया था।