नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानों का दौर तेज हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के ठाणे से सांसद नरेश म्हस्के ने उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान म्हस्के ने दावा किया कि 2019 में संजय राउत ने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए मुंबई के पवई स्थित एक होटल में पार्टी विधायकों की गुप्त बैठक बुलाई थी, क्योंकि वे खुद राज्य का मुखिया बनना चाहते थे।
उद्धव और रश्मि ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का आरोप
सांसद नरेश म्हस्के ने आरोप लगाया कि पवई होटल की बैठक के दौरान संजय राउत ने विधायकों से उद्धव ठाकरे का विरोध करने और उनके स्थान पर खुद का नाम आगे बढ़ाने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा उम्मीदवारी में देरी और अपने भाई को मंत्री पद न मिलने से नाराज राउत ने बैठक में उद्धव ठाकरे और उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।
शिवसेना पर कब्जे और कांग्रेस में विलय की साजिश का दावा
म्हस्के ने संजय राउत पर अविभाजित शिवसेना को कमजोर करने और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
विभाजन की वजह: उद्धव ठाकरे के मन में मुख्यमंत्री बनने का विचार संजय राउत ने ही डाला था, जिसके कारण राज्य को एक असफल मुख्यमंत्री मिला और पार्टी में बिखराव आया।
कांग्रेस में विलय का उद्देश्य: राउत का अंतिम लक्ष्य शिवसेना को अपने नियंत्रण में लेकर उसका कांग्रेस में विलय कराना था।
शिंदे पर लगाए आरोपों को सिद्ध करने की चुनौती
नरेश म्हस्के ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि 2022 में बगावत के समय उन्होंने उद्धव ठाकरे से स्पष्ट कह दिया था कि एकनाथ शिंदे के साथ अन्याय हुआ है। इसके साथ ही म्हस्के ने संजय राउत को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे एकनाथ शिंदे के खिलाफ अपनी शिकायतों का एक भी लिखित पत्र सार्वजनिक नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने सांसद पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
फिलहाल, नरेश म्हस्के के इन तीखे हमलों और गंभीर आरोपों पर संजय राउत या उद्धव ठाकरे गुट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









