न्यूयोर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के कार्यप्रणाली सुधारों पर आयोजित एक उच्चस्तरीय खुली चर्चा के दौरान भारत ने सुरक्षा परिषद में व्यापक बदलावों और वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की जोरदार वकालत की। बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए राजदूत योजना पटेल ने कहा कि विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक सुरक्षा मंच पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों, विशेषकर अस्थायी सदस्यों को, नीतिगत दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया तक समान अधिकार और पहुंच मिलनी चाहिए ताकि वे सुरक्षा संबंधी मामलों में सार्थक भूमिका निभा सकें।
शांति मिशनों और सहायक निकायों में सुधार की मांग
भारतीय प्रतिनिधि योजना पटेल ने स्पष्ट किया कि जो देश सीधे तौर पर किसी क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय मुद्दे से प्रभावित हैं, उन्हें सुरक्षा परिषद के निर्णयों में भागीदार बनाया जाना अनिवार्य होना चाहिए। विशेष रूप से शांति स्थापना मिशनों (पीसकीपिंग मिशन्स) के जनादेश (मैनडेट) और संसाधन आवंटन जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में संबंधित देशों की सीधी भूमिका होनी चाहिए। इसके अलावा, भारत ने दस्तावेज संख्या-507 में आवश्यक संशोधन करने की मांग करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद के सहायक निकायों (सब्सिडियरी बॉडीज) के अध्यक्षों के चयन के लिए एक स्पष्ट, गैर-समझौतावादी और अंतिम समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीतिक दोहरे रवैये का विरोध
चर्चा के दौरान भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। राजदूत योजना पटेल ने कहा कि इस मंच का उपयोग आतंकियों को वैधता प्रदान करने या किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत आतंकवादियों को काली सूची से हटाने और अन्य संस्थाओं को गलत तरीके से सूचीबद्ध करने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कार्रवाई या सूचीकरण प्रक्रिया के लिए ठोस, निष्पक्ष मापदंड और प्रामाणिक दस्तावेजों का होना अत्यंत आवश्यक है।









