पीआरए ग्रुप केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, अमन साहू समेत सभी 7 आरोपी दोषमुक्त

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रायपुररायपुर के गंज थाना क्षेत्र स्थित पीआरए ग्रुप के कार्यालय में हुई गोलीबारी और डकैती की साजिश के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने गैंगस्टर अमन साहू समेत सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष लगाए गए आरोपों को कानूनन साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।

पुलिस ने रोहित स्वर्णकार, मुकेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राजबीर सिंह, पप्पू सिंह उर्फ पापसा और अमन साहू के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था। पुलिस का दावा था कि ये सभी आरोपी रेलवे स्टेशन के पास पीआरए ग्रुप के ठिकाने पर डकैती डालने और रंगदारी वसूलने की नीयत से दहशत फैलाने का षड्यंत्र रच रहे थे।

गवाह की शिनाख्त और पिस्तौल जब्ती पर उठे सवाल

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन के दावों में कई कमियां उजागर हुईं। पुलिस ने जिस मुख्य गवाह को मयंक सिंह बताकर पेश किया था, अदालत में जिरह के दौरान उसकी वास्तविक पहचान सुनील कुमार मीणा के रूप में हुई। पुलिस उस गवाह की सही पहचान और मामले में उसकी भूमिका का कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सकी।

इसके अलावा, आरोपियों के पास से पिस्तौल की जब्ती और उसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए, जिससे पुलिस की पूरी कहानी संदेह के दायरे में आ गई।

2025 में एनकाउंटर में मारा गया था मुख्य आरोपी

मामले का मुख्य आरोपी अमन साहू 11 मार्च 2025 को पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। उसे झारखंड पुलिस की हिरासत में रायपुर से रांची ले जाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, पलामू के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसने एक पुलिसकर्मी की इंसास राइफल छीनकर भागने और गोली चलाने का प्रयास किया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह ढेर हो गया था।

बचाव पक्ष ने दी यह दलील

बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि पुलिस ने आरोपियों पर डकैती की योजना बनाने और अवैध हथियार रखने के गंभीर आरोप तो लगाए, लेकिन सुनवाई के दौरान इनके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। मयंक सिंह नाम के व्यक्ति को लेकर भी पुलिस की थ्योरी पूरी तरह अस्पष्ट रही। अदालत ने इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया।