हर वक्त फोन में लगे रहना पड़ सकता है भारी, दिमाग की एकाग्रता पर पड़ रहा असर

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सुबह उठने से लेकर रात को सोने से कुछ मिनट पहले तक मोबाइल से चिपके रहने की आदत अब आम हो चुकी है। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, लगातार मैसेज का रिप्लाई करना और हर थोड़ी देर में स्क्रीन नोटिफिकेशन चेक करना हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है। हालांकि तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगे हैं।

मोबाइल और घटती मानसिक कार्यक्षमता

शोधकर्ताओं का मानना है कि मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता हमारे दिमाग को आलसी बना रही है और उसकी कार्यक्षमता को कमजोर कर रही है। एक मेटा-विश्लेषण में 22 अध्ययनों के जरिए यह पाया गया है कि मोबाइल का लगातार इस्तेमाल याददाश्त, ध्यान और संज्ञानात्मक प्रदर्शन पर नकारात्मक असर डालता है। पहले छोटी-छोटी जानकारियों के लिए किताबें या दिमागी कसरत का सहारा लिया जाता था, लेकिन अब इंटरनेट से तुरंत जवाब मिलने के कारण दिमाग को मेहनत ही नहीं करनी पड़ती।

स्क्रीनशॉट लेने की आदत से कमजोर होती याददाश्त

अमेरिकी बिंघमटन यूनिवर्सिटी के एक शोध 'डिजिटल एमनीशिया' में यह सामने आया है कि मोबाइल पर किसी काम की चीज या खूबसूरत पल का तुरंत स्क्रीनशॉट लेने की आदत हमारी याददाश्त को कमजोर करती है। शोध के अनुसार, जिन चीजों को सिर्फ आंखों से देखा गया, वे लंबे समय तक याद रहीं, जबकि जिनकी तस्वीरें खींची गईं या स्क्रीनशॉट लिए गए, उन्हें लोग जल्दी भूल गए।

नींद और बच्चों के विकास पर असर

देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से सोने का समय पीछे खिसकता है, जिससे नींद पूरी नहीं होती और अगले दिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बच्चों के सामने माता-पिता द्वारा लगातार फोन या लैपटॉप का उपयोग करने से बच्चों की भाषा सीखने और बोलने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।