होर्मुज संकट के बीच ईरान का न्यूक्लियर प्लान, परमाणु हथियार पर क्या है स्थिति?

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मध्य पूर्व: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य क्षमताओं को लेकर वैश्विक चिंताओं को बढ़ा दिया है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस टकराव का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां से गुजरने वाले वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता ईरान के पास एक बड़े रणनीतिक दबाव के रूप में मौजूद है।

ईरान का परमाणु भंडार और क्षमता

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और वैश्विक विशेषज्ञों की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार मौजूद है।

  • परमाणु क्षमता: सैद्धांतिक रूप से, 60% संवर्धित यूरेनियम को हथियारों के स्तर (90% संवर्धन) तक पहुंचाने के लिए बहुत कम समय की आवश्यकता होती है। यह मात्रा लगभग 10 परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

  • संवर्धन का सामान्य पैमाना: नागरिक परमाणु संयंत्रों के लिए 3% से 5% और चिकित्सा अनुसंधान के लिए अधिकतम 20% संवर्धन की आवश्यकता होती है।

हालांकि, केवल यूरेनियम ही पर्याप्त नहीं है; इसके लिए विशेष वॉरहेड निर्माण तकनीक और वितरण प्रणाली की आवश्यकता होती है। इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के 'तकनीकी ज्ञान' को नष्ट नहीं किया जा सकता।

रणनीतिक विकल्प: परमाणु सुरक्षा कवच या होर्मुज की घेराबंदी?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों में ईरान की रणनीति को लेकर दो मुख्य दृष्टिकोण हैं:

  1. परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence): कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के पास पहले से परमाणु हथियार होते, तो अमेरिका या इजरायल उस पर सीधे हमले करने से हिचकिचाते। ऐसे में तेहरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

  2. होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण: दूसरा दृष्टिकोण यह है कि ईरान बिना परमाणु हथियार के भी दशक भर से अमेरिकी दबाव का सामना करता आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या वहां वाणिज्यिक जहाजों को रोकने की उसकी पारंपरिक सैन्य क्षमता ही एक प्रभावी रणनीतिक हथियार के रूप में काम कर रही है।

कूटनीति और जेसीपीओए (JCPOA) का भविष्य

वर्ष 2015 का 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (JCPOA) समझौता इस बात का उदाहरण है कि कूटनीति के जरिए इस संकट को सुलझाया जा सकता है। 2018 में अमेरिका के इस समझौते से बाहर निकलने के बाद ही ईरान ने उच्च-स्तरीय संवर्धन पुनः शुरू किया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि आपसी अविश्वास के माहौल को समाप्त कर एक नया कूटनीतिक समझौता ही मध्य पूर्व में दीर्घकालिक स्थिरता ला सकता है।