रामेन डेका पर आपत्तिजनक पोस्ट का मामला, हाईकोर्ट ने राहत के साथ लगाई सख्त शर्तें

0
7

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में उच्च न्यायालय ने प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी को बड़ी राहत प्रदान की है। हालांकि, इस राहत के साथ कोर्ट ने दोनों आरोपियों के सामने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। अब उन्हें न्यायालय और जनता के समक्ष सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी तथा सोशल मीडिया से सभी आपत्तिजनक सामग्री को स्थायी रूप से हटाना होगा।

हाईकोर्ट के निर्देश और शर्तें

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी को अपने फेसबुक अकाउंट समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रमुखता से सार्वजनिक माफी मांगनी होगी। इसके साथ ही, उन्हें सभी इंटरनेट माध्यमों से आपत्तिजनक पोस्ट पूरी तरह से हटाने होंगे और भविष्य में इस तरह का अनुचित आचरण दोबारा न दोहराने के लिए न्यायालय में एक औपचारिक शपथपत्र भी दाखिल करना होगा।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने अपने-अपने फेसबुक खातों से असमिया भाषा में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक लेख और आपत्तिजनक कार्टून बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए थे।

इस घटना के विरोध में राजभवन की तरफ से राजधानी के सिविल लाइंस थाने में दोनों आरोपियों के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बाद में यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा, जिसके खिलाफ दोनों आरोपियों ने कार्रवाई रद्द करवाने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ताओं की दलील और सुनवाई

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगने और सोशल मीडिया से विवादित पोस्ट हटाने की बात रखी। वहीं, राज्य पक्ष और अन्य अधिवक्ताओं ने इस कृत्य को गंभीर बताते हुए आपत्ति जताई कि संवैधानिक पद पर बैठे प्रथम नागरिक के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां बिल्कुल भी क्षम्य नहीं हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट में दोबारा माफी मांगते हुए लिखित शपथ पत्र पेश किया, जिसके बाद अदालत ने तय शर्तों के साथ उन्हें राहत दे दी है।