भारत पर नेपाल की बिजली निर्भरता, सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये की बिजली करता है आयात

0
10

नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण नेपाल में लगभग 2500 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि मृतकों का आंकड़ा 788 के पार पहुंच गया है। इस आपदा से देश की जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। इस संकट की घड़ी में भारत पड़ोसी मित्र देश नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और उसे बिजली आपूर्ति में लगातार सहायता प्रदान कर रहा है। त्रिशुली और भोटेकोशी नदी घाटियों में आई उफनती बाढ़ के कारण नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता में करीब 550 मेगावाट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आपदा से पूर्व नेपाल भारत को रोजाना 950 से 1000 मेगावाट बिजली का निर्यात कर रहा था, जो अब सिमटकर महज 400 मेगावाट रह गया है।

बिजली संकट से उबारने को भारत ने दी एडवांस आयात की मंजूरी

नेपाल में पैदा हुए गंभीर बिजली संकट से निपटने के लिए भारत ने सितंबर महीने से ही उसे एडवांस बिजली आयात की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। अमूमन सर्दियों के दिनों में जब नेपाल की नदियों में जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, तब भारत उसे बिजली की बिक्री करता है। वर्ष 2025-26 के दौरान भी भारत ने नेपाल को करीब 1450 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की थी। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नेपाल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से सालाना लगभग 800 करोड़ से 1,000 करोड़ भारतीय रुपये की बिजली का आयात करता है।

मौसम आधारित बिजली विनिमय और 10 हजार मेगावाट का समझौता

दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। गर्मियों और मानसून के मौसम में जब नेपाल की नदियों में पानी का बहाव तेज होता है, तब वह भारत को बिजली बेचता है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 में भारत ने नेपाल से 3299 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी थी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच हुए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत अगले 10 वर्षों में नेपाल से कुल 10,000 मेगावाट जलविद्युत का आयात करेगा। जुलाई 2026 में हुए नवीनतम करार के अनुसार, भारत और नेपाल 400 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से परस्पर 1650 मेगावाट तक बिजली का निर्यात और 1400 मेगावाट तक का आयात कर सकते हैं।