खंडवा। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के विरोध में माहौल बनाने की कोशिश कर रही एआईएमआईएम (AIMIM) को भीतर ही बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने अनुशासनहीनता का चाबुक चलाते हुए खंडवा के वरिष्ठ नेता बिलाल खान उर्फ बिलाल पेंटर को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। देर रात जारी आदेश के तहत बिलाल की प्राथमिक सदस्यता रद्द करने के साथ ही उनसे तमाम पद छीन लिए गए हैं। बिलाल वही नेता हैं जिनकी पत्नी शकीरा ने 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में पार्षद का पद जीतकर मध्य प्रदेश में एआईएमआईएम की पहली जीत दर्ज कराई थी।
जिसने खुलवाया जीत का खाता, अब वही पार्टी से बाहर
दरअसल, एआईएमआईएम का शीर्ष नेतृत्व इस समय यूसीसी के खिलाफ जनमत जुटाने के लिए प्रदेशभर में रैलियां कर रहा है। इसी सिलसिले में प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान का दल खंडवा प्रवास पर था। मंगलवार रात बिलाल पेंटर के ही वार्ड में एक विशाल आमसभा प्रस्तावित थी, जिसकी व्यवस्था और भीड़ एकत्र करने का जिम्मा बिलाल के पास था। हालांकि, आयोजन के समय मैदान पूरी तरह खाली नजर आया और अपेक्षित लोग नहीं पहुंचे, जिससे मंच पर मौजूद प्रादेशिक नेता असहज हो गए।
सभा की अनुमति को लेकर भी नाराजगी की बात
भीड़ न जुटने के अलावा प्रशासनिक अनुमति को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर अनुमति के लिए दिए गए आवेदन में यूसीसी के विरोध का कोई जिक्र नहीं किया गया था, बल्कि केवल पदाधिकारियों के रुकने और भोजन की बात कही गई थी। इस ढुलमुल रवैए से नाराज होकर प्रदेश अध्यक्ष ने देर रात करीब 1:30 बजे बिलाल को निष्कासित करने का फैसला सुना दिया।
हैंडरिटन आदेश में क्या कहा गया?
प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अपने हाथ से लिखे गए निष्कासन पत्र में स्पष्ट हिदायत दी गई है कि बिलाल खान का अब एआईएमआईएम से कोई संबंध नहीं रहेगा। वे पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, आधिकारिक लेटरहेड या पदनाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, वे खुद को पार्टी का कार्यकर्ता या प्रतिनिधि बताकर कोई भी बयान जारी करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे।
संगठन में अब कोई पद या जिम्मेदारी नहीं
इस सख्त कदम के बाद बिलाल खान को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में पार्टी को पहली चुनावी सफलता दिलाने में अहम योगदान देने वाले स्थानीय चेहरे पर हुई इस कार्रवाई के बाद खंडवा के सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।









