‘अमित ठाकरे पर तुरंत FIR, अजित पवार पर चुप्पी क्यों?’ महायुति सरकार पर बरसीं सुप्रिया सुले

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ठाणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार और अजित पवार गुट पर जमकर निशाना साधा है। बुधवार को ठाणे स्थित पार्टी दफ़्तर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने मनसे नेता अमित ठाकरे पर दर्ज हुए केस का हवाला देकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

पीएम की तस्वीर और एफआईआर का मुद्दा

सुप्रिया सुले ने कहा कि बांद्रा स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्टर हटाए जाने के मामले में अमित ठाकरे के खिलाफ महज दो घंटे के भीतर मामला दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन क्रैश में हुई असमय मृत्यु के मामले में इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने सरकार पर पक्षपातपूर्ण और दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

सत्ता में बैठे नेताओं की चुप्पी पर सवाल

बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने अजित पवार गुट के नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अजित पवार के देहांत के बाद भी उनके दल के सांसद और विधायक सत्ता का सुख भोग रहे हैं, लेकिन हादसे की एफआईआर और जांच को लेकर किसी भी नेता ने एक शब्द नहीं बोला है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इस दुखद हादसे की जांच किस दिशा में जा रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी परिवार तक को नहीं दी जा रही है।

विमान हादसे की चल रही है जांच

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के समय एक दुखद विमान हादसे में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित छह लोगों का निधन हो गया था। इस मामले की विस्तृत जांच फिलहाल नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों में कम दृश्यता और रनवे के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को हादसे की मुख्य वजह माना गया था।

अजित पवार के बाद सुनेत्रा पवार ने संभाली कमान

अजित पवार के निधन के उपरांत उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। वहीं, उनके बड़े बेटे पार्थ पवार भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए राज्यसभा पहुंचे हैं। हालांकि, सुप्रिया सुले के इस नए बयान के बाद राज्य में एफआईआर और जांच की गति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।