नई दिल्ली। दिल्ली से मैसूर जा रही स्वर्ण जयंती सुपरफास्ट एक्सप्रेस में ट्रेन के भीतर अपनी बर्थ पर दीया जलाना एक यात्री को भारी पड़ गया। सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने और ट्रेन में आग का खतरा पैदा करने के आरोप में रेलवे अधिकारियों ने उसे ट्रेन से नीचे उतार दिया। यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में 55 वर्षीय इस यात्री के खिलाफ रेलवे एक्ट, 1989 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सह-यात्रियों की शिकायत पर टीटीई ने की कार्रवाई
घटना उस समय की है जब ट्रेन हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से मैसूर की ओर रवाना हुई थी। सफर के दौरान कोच में मौजूद अन्य यात्रियों ने टीटीई से शिकायत की कि एक व्यक्ति अपनी बर्थ पर दीया जलाकर बैठा है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे टीटीई ने यात्री को पीतल के दीये में लौ जलाए हुए पाया। उसके पास माचिस और अन्य पूजा सामग्री भी मौजूद थी। टीटीई ने उसे समझाया कि चलती ट्रेन में खुली लौ जलाना खतरनाक हो सकता है और तुरंत दीया बुझाने को कहा, लेकिन यात्री ने अपनी पूजा पूरी होने तक दीया बुझाने से साफ इनकार कर दिया।
भुसावल स्टेशन पर उतारा गया, बनाया गया वीडियो
यात्री के अड़ियल रवैये को देखते हुए टीटीई ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया। इसके बाद आगे भुसावल स्टेशन आने पर यात्री को ट्रेन से नीचे उतार दिया गया और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के हवाले कर दिया गया, जहां उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
चलती ट्रेन में दीया जलाना क्यों है खतरनाक?
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे यात्रियों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन ट्रेन के भीतर दीया, मोमबत्ती या अगरबत्ती जलाना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है। डिब्बों में पर्दे, सीट कवर, कपड़े और बैग जैसी ज्वलनशील वस्तुएं होती हैं। चलती ट्रेन के झटकों से दीया गिरने पर भयंकर आग लगने की दुर्घटना हो सकती है।
रेलवे एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
इस मामले में यात्री के खिलाफ रेलवे एक्ट की धारा 153 और धारा 145(बी) के तहत कार्रवाई की गई है। धारा 153 के तहत ट्रेन की सुरक्षा और यात्रियों के जीवन को खतरे में डालने वाली गतिविधियों के लिए अधिकतम पांच साल तक की जेल और जुर्माने का सख्त प्रावधान है।









