नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढहने से पूरी राजधानी में हड़कंप मच गया है। पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में इस्तेमाल की जा रही यह इमारत ताश के पत्तों की तरह गिर पड़ी। इस खौफनाक दुर्घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के ठीक नीचे बैठा एक बुजुर्ग व्यक्ति मलबा गिरते ही जान बचाकर भागता नजर आ रहा है। मोती बाग के पास हुए इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। मलबे के नीचे कई छात्रों सहित अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम, कैट्स एम्बुलेंस और प्रशासनिक अधिकारी आधुनिक उपकरणों की मदद से जिंदगियों को बचाने के प्रयास में जुटे हैं।
जर्जर इमारतों पर नकेल और सीलिंग के आदेश
इस दुर्घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रभावित गली की अन्य पुरानी व जर्जर इमारतों को नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, गिरी हुई इमारत लगभग 55 वर्ग गज की थी जिसका निर्माण 1990 के दशक में हुआ था। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चार मंजिल से अधिक बनी सभी अवैध इमारतों को तुरंत सील किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा।
मजिस्ट्रियल जांच और FIR के निर्देश
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस हादसे के जिम्मेदारों के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों के सामने रहने का संकट
प्रशासन द्वारा सुरक्षा के लिहाज से आसपास के कई पीजी खाली करवा लिए गए हैं। कार्रवाई के खौफ से कई संचालकों ने अपने बोर्ड हटा दिए। अचानक कमरे खाली होने से छात्रों और कामकाजी युवाओं के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावित छात्रों के लिए नजदीकी कॉलेजों में अस्थायी रहने का प्रबंध किया है, जबकि विभिन्न छात्र संगठनों ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था की है।
सुरक्षा मानकों और नियमों पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने शहर में अवैध रूप से चल रहे पीजी और किराए के मकानों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इमारतों की ढांचागत मजबूती, अग्निशमन सुरक्षा और आपातकालीन निकास जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जर्जर भवनों की जांच की जाती, तो इतना बड़ा हादसा होने से रोका जा सकता था।









