नई दिल्ली/पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में शिवसेना पदाधिकारियों द्वारा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर किए गए हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने राज्य में डॉक्टरों के साथ बढ़ती मारपीट की घटनाओं पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि चिकित्सकों पर हमला करने वाले लोग खुली छूट या जमानत के हकदार नहीं हैं और सरकार को ऐसे तत्वों को तुरंत हिरासत में लेना चाहिए।
शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक अन्य मामले में जमानत पर बाहर चल रहे शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा म्हात्रे की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि पालघर में डॉक्टरों के साथ मारपीट की नई घटना यह दर्शाती है कि स्थिति बिगड़ रही है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए, जो समाज के लिए एक नजीर बने।
निचली अदालत के रवैये पर सख्त टिप्पणी, अगली सुनवाई 28 सितंबर को
मामले की पृष्ठभूमि में मुंबई उच्च न्यायालय ने 18 जुलाई को म्हात्रे को निचली अदालत से मिली जमानत पर रोक लगाते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए थे। बाद में 7 अगस्त को हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत दे दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत ने दोहराया कि हाईकोर्ट का शुरुआती रुख सही था कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले जमानत के पात्र नहीं हैं। इस पूरे मामले पर अब 28 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।









