लखनऊ यूनिवर्सिटी में किताबों का उत्सव, सीएम योगी ने छात्रों को दिया पढ़ने का मंत्र

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लखनऊ| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अवश्य पढ़नी और जीवन में उतारनी चाहिए। यह कहना पूरी तरह अनुचित होगा कि युवा पुस्तकें नहीं पढ़ते, असल जरूरत किताबों को उन तक पहुंचाने की थी। ज्ञान को संकुचित दायरे में बांधने के दुष्परिणाम समाज और देश, दोनों को भुगतने पड़ते हैं। एक दशक पूर्व उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था।

राज्य के युवाओं के सामने पहचान का संकट था और नागरिक अपनी पहचान बताने से कतराते थे। निरंतर सकारात्मक प्रयासों के बल पर आज प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। डिजिटल तकनीक ने शहर और गांव की भौगोलिक दूरी को मिटा दिया है।

गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ

मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 का उद्घाटन करने के बाद युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों को ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पुस्तक भेंट की। उन्होंने कहा कि यह किताब केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए अत्यंत उपयोगी है। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। जब कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति का साहस डगमगाने लगता है, तब यह पुस्तक उसका मार्गदर्शक बनती है।

युवाओं का पुस्तकों से दूरी का दावा अनुचित

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कहना कि युवा किताबों से दूर हो गया है या डिजिटल माध्यमों पर समय नष्ट कर रहा है, पूरी तरह गलत है। जब पहली बार लखनऊ में पुस्तक महोत्सव के आयोजन का प्रस्ताव आया, तब इस पर विचार कर इसे आगे बढ़ाया गया। इसके सफल परिणामों को देखते हुए गोरखपुर में भी इसका आयोजन किया गया, जहां भारी जनसैलाब उमड़ा। इससे यह सिद्ध हो गया कि युवा आज भी पढ़ने में रुचि रखता है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र तब कमजोर होता है जब वह अपनी समृद्ध विरासत से कटने लगता है। पूर्व में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सीमित करने का प्रयास किया गया। उत्तर प्रदेश सदैव से ज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। नैमिषारण्य में ऋषियों का चिंतन, काशी की संवाद परंपरा और शुक्रतीर्थ में भागवत कथा का वाचन इस बात के प्रमाण हैं।

विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम हैं पुस्तक मेले

पुस्तक महोत्सव युवाओं, विद्यार्थियों, लेखकों और प्रकाशकों को एक साझा मंच प्रदान करता है। 9 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में पुस्तकों के विमोचन और लेखकों से संवाद का अवसर मिलेगा। आत्मकथाओं और शोध पुस्तकों के माध्यम से महापुरुषों के संघर्ष और वैज्ञानिकों की यात्रा को समझा जा सकता है।

ज्ञान के सभी द्वार खुले रखने का संदेश

ऋषि परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान को किसी सीमा में नहीं बांधना चाहिए। केवल पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही पूर्ण ज्ञान नहीं है। समाज और दुनिया को समझने के लिए विविध विषयों से जुड़ना आवश्यक है। लखनऊ की पावन धरा से अनेक साहित्यकारों ने अपनी कालजयी कृतियों से समाज को दिशा दी है।

डिजिटल युग और ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय

डिजिटल क्रांति ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर समाप्त कर दिया है। राज्य की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। युवाओं को बेहतर अवसर और मंच मिलने पर वे अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कायाकल्प

बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' के माध्यम से स्कूलों के भवनों का जीर्णोद्धार किया गया और स्मार्ट क्लास की सुविधाएं दी गईं। चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर एक छोटी बच्ची ने आत्मविश्वास से डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई।

युवा विकसित करें अपना 'बुक बैंक'

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी व्यक्तिगत लाइब्रेरी या 'बुक बैंक' बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के अलावा रचनात्मक, साहित्यिक, धार्मिक और वैज्ञानिक पुस्तकों को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। अच्छी पुस्तकें जीवनभर प्रेरणा देती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

ज्ञान की परंपरा का हो व्यापक विस्तार

आयोजकों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पुस्तक मेलों का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी किया जाना चाहिए। राज्य सरकार इस कार्य में पूर्ण सहयोग दे रही है और नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की प्रमुख खरीदार है। गांवों और शैक्षणिक संस्थानों में पुस्तकालयों का निर्माण आज की महती आवश्यकता है।