नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है। आयोग द्वारा दोनों पक्षों के साथ मैराथन बैठकें की जा चुकी हैं, लेकिन नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर नजदीक होने के बावजूद स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है कि आयोग इससे पहले कोई फैसला सुना पाएगा या नहीं।
दोनों गुटों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान
ऋतब्रत बनर्जी गुट का पक्ष: शुक्रवार को चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की दलीलें सुनी थीं। इसके बाद, आयोग के निर्देश पर इस गुट ने शनिवार शाम तक अपने दावों के समर्थन में आवश्यक अतिरिक्त स्पष्टीकरण और दस्तावेज आधिकारिक रूप से जमा करा दिए।
ममता बनर्जी गुट को नोटिस: बागी गुट द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा के बाद, चुनाव आयोग ने शनिवार रात ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को एक पत्र भेजकर उस पर उनकी आधिकारिक राय और जवाब तलब किया है।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने भी आयोग से संपर्क कर विरोधी गुट द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों की प्रतियां और विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
16 सितंबर नामांकन की अंतिम तिथि और असमंजस
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन ताजा घटनाक्रमों और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते आगामी उपचुनावों से पहले आयोग का कोई बड़ा फैसला आना बेहद मुश्किल है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है, और इतने कम समय में पार्टी के नाम और 'जोड़े फूल' जैसे चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला लेना आयोग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्या होगा यदि समय पर फैसला नहीं आया?
यदि चुनाव आयोग समय रहते इस विवाद पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाता है, तो ऐसी स्थिति में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को उपचुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिन्ह के बिना ही मैदान में उतरना पड़ सकता है। ऐसे में आयोग दोनों गुटों को 'फ्री सिंबल' (मुफ्त चुनाव चिन्ह) या अपनी ओर से कोई अन्य वैकल्पिक चिन्ह आवंटित कर सकता है, जिससे वे अपने उम्मीदवार चुनाव में उतार सकें।









