पटना। स्थानीय बिहार राज्य अभिलेख भवन के सभागार में हिंदी दिवस के अवसर पर एक भव्य सह-कवि सम्मेलन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और समृद्ध साहित्यिक परंपरा की मजबूत पहचान है।
हिंदी वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक प्रयुक्त भाषाओं में शामिल समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। बिहार की भूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यापति, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' और जनकवि नागार्जुन जैसे महान साहित्यकारों ने अपनी रचनाधर्मिता से हिंदी को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयां दी हैं।
राज्य में होगा दो दिवसीय हिंदी साहित्य समागम हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक विस्तार को गति देने के लिए बिहार सरकार जल्द ही दो दिवसीय 'हिंदी साहित्य समागम' का आयोजन करेगी। इसमें देश भर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस आयोजन की तैयारियां तय समय सीमा के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ की समस्या पर केंद्र सरकार की पैनी नजर राज्य में बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस आपदा के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यस्त अंतरराष्ट्रीय व्यस्तताओं के बावजूद बिहार में बाढ़ के हालातों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील रहे हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम शीघ्र ही बिहार का दौरा कर नुकसान का आकलन करेगी। उन्होंने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ना और उनका संरक्षण करना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अतिथियों का स्वागत और पत्रिका का विमोचन कार्यक्रम के दौरान मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री को हरा पौधा, अंगवस्त्र तथा प्रसिद्ध कृतियां 'मैला आंचल' और 'दिनकर की डायरी' भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर राजभाषा पत्रिका का आधिकारिक लोकार्पण भी किया गया









