इंजीनियर्स डे पर खास कहानी! खुर्जा की पॉटरी इंडस्ट्री में इंजीनियरिंग का कमाल, जिगर-जॉली से रोलर हेड तक सफर

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बुलंदशहर: मशीन और आधुनिक तकनीक ने मैन्युफैक्चरिंग को न केवल आसान, तेज और बेहतर बनाया है, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार किया है। इसका मुख्य श्रेय इंजीनियरों की नवाचारी सोच को जाता है। इंजीनियरिंग के इस परिवर्तनकारी योगदान का प्रत्यक्ष उदाहरण खुर्जा के विश्वप्रसिद्ध पॉटरी उद्योग में स्पष्ट देखा जा सकता है। जिगर जॉली मशीन से लेकर रोलर हेड और आधुनिक टनल भट्ठी तक, तकनीक ने यहाँ की पूरी उत्पादन प्रणाली को बदल कर रख दिया है। लगभग 400 औद्योगिक इकाइयों और प्रतिवर्ष करीब 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले इस विशाल उद्योग में, जहाँ कभी चाक पर हाथों से बर्तन गढ़े जाते थे, वहीं अब अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार हो रहे हैं।

मुगलकालीन पारंपरिक चाक से जिगर जॉली और मॉडर्न ऑटोमेशन तक का सफर

पॉटरी उद्योग विशेषज्ञ निखिल पोद्दार के अनुसार, खुर्जा में पॉटरी कला का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा हुआ माना जाता है। शुरुआती दौर में कारीगर चाक पर अपने हाथों के हुनर से मिट्टी को विभिन्न आकार देकर बर्तन बनाते थे। वर्ष 1962 के आसपास खुर्जा में पहली बार 'जिगर जॉली' मशीन का आगमन हुआ, जिससे उत्पादों को एक समान फिनिशिंग और मानक आकार देने में बड़ी सफलता मिली।

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट संचालक जोनू चौहान का कहना है कि बीते पांच वर्षों के दौरान पॉटरी निर्माण में ऑटोमेशन और आधुनिक मशीनीकरण का उपयोग अत्यधिक तेजी से बढ़ा है। पूर्व में मिट्टी की गूंथाई और तैयारी का श्रमसाध्य काम कारीगर स्वयं हाथों से करते थे, किंतु अब 'पग मिल', 'वॉल मिल' और 'फिल्टर प्रेस' जैसी उन्नत मशीनों की बदौलत मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सुगम और त्वरित हो गई है।

गुणवत्ता में अंतरराष्ट्रीय सुधार, 12 घंटे का कार्य अब मात्र तीन घंटे में

व्यापारी निखिल बताते हैं कि मशीनों के आने से उत्पादन प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ उत्पादों की फिनिशिंग और क्वालिटी पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। एक दौर था जब खुर्जा के सिरेमिक उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर कमतर आंका जाता था, लेकिन आज यहाँ वैश्विक गुणवत्ता के पॉटरी आइटम्स तैयार किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, निर्माण में लगने वाले समय में भी भारी कमी आई है। जिस उत्पाद को पहले तैयार होने में लगभग 12 घंटे का समय लगता था, वह अब आधुनिक तकनीकों के दम पर महज तीन घंटे में बनकर तैयार हो जाता है।

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और 3D तकनीक से मिला वैश्विक बाजार

तकनीकी क्रांति का गहरा असर पॉटरी की डिजाइनिंग, फिनिशिंग और मार्केटिंग पर भी साफ झलक रहा है। अब कंप्यूटर आधारित 3D डिजाइनिंग और आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से नए-नए आकर्षक मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। पॉटरी एसोसिएशन की ओर से एक विशेष 3D मशीन भी स्थापित की गई है, जिसकी सहायता से नए डिजाइनों के सैंपल त्वरित रूप से तैयार करके बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को प्रदर्शित किए जाते हैं।

दूसरी ओर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने खुर्जा के सिरेमिक हस्तशिल्प को देश-विदेश के घर-घर तक पहुँचा दिया है। स्थानीय निवासी निशांत बताते हैं कि वे विभिन्न पॉटरी इकाइयों से कप सेट और सिरेमिक डेकोरेशन आइटम्स खरीदकर ऑनलाइन माध्यमों से बेचते हैं, जिससे उन्हें बिना किसी भौगोलिक सीमा के नए ग्राहकों तक सीधे पहुँचने में आसानी हुई है। इस प्रकार, जहाँ मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने मशीनों और उत्पादन को गति दी, वहीं कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ने डिजाइनिंग और विपणन का पूरा परिदृश्य ही बदल दिया है।