सुनने की क्षमता लौटी, तो पंख लगे सपनों को

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रायपुर : कैसे आधुनिक तकनीक और सही समय पर मिली मदद किसी व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बदल सकती है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जैसे आदिवासी बहुल और दूरदराज के क्षेत्र में रहने वाली प्रमिला के लिए श्रवण यंत्र सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का एक जरिया बना।

      ​छत्तीसगढ़ के सुदूर आंचल नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली  कक्षा 8वीं की छात्रा प्रमिला के लिए जिंदगी एक खामोश पहेली जैसी बन गई थी। श्रवण बाधिता के कारण उसे न केवल दूसरों की बातें समझने में कठिनाई होती थी, बल्कि कक्षा में शिक्षकों के व्याख्यान स्पष्ट न सुन पाने से उसकी पढ़ाई की रफ्तार भी थमने लगी थी।

​           जिला प्रशासन नारायणपुर द्वारा जिले में दिव्यांगजनों को शासकीय योजनाओं से जोड़कर सशक्त बनाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत आयोजित शासकीय स्वास्थ्य शिविर में प्रमिला का परीक्षण हुआ, जहां उसकी श्रवण बाधिता की पहचान की गई। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए उसका यूडीआईडी (UDID) पोर्टल पर पंजीयन कराकर दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड जारी किया गया।

बदली जिंदगी, बढ़ा आत्मविश्वास

      ​      समाज कल्याण विभाग द्वारा 8 सितंबर 2026 को प्रमिला को आधुनिक श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। श्रवण यंत्र लगाते ही प्रमिला के आसपास की खामोशी दूर हो गई। अब वह स्पष्ट सुन पा रही है, जिससे उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है। कक्षा में पढ़ाई अब उसके लिए आसान हो गई है और वह आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए बेहद उत्साहित है। इसके साथ ही परिवार और दोस्तों के साथ संवाद अब बिना किसी रुकावट के हो रहा है।

            ​प्रमिला और उसके पिता सुकुम ने शासन-प्रशासन की इस संवेदनशील पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिली सही मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।