यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में सीटों का गणित उलझा, 45-50 सीटों पर अटकी बात

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं, जहां एक तरफ कांग्रेस बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही है, वहीं सपा का जोर पूरी तरह से जिताऊ समीकरणों पर है।

कांग्रेस की बड़ी सीटों की मांग और सपा का रुख

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने 2017 के गठबंधन का हवाला देते हुए 100 से अधिक (करीब 105 से 120) सीटों पर अपना दावा पेश किया है। हालांकि, अंदरखाने चल रही चर्चाओं के मुताबिक कांग्रेस को 45 से 50 या अधिकतम 60-70 सीटों तक सीमित रखने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी साफ कर चुकी है कि सीटों का फैसला केवल संख्या के आधार पर नहीं होगा। सपा नेतृत्व का स्पष्ट रुख है कि कांग्रेस को केवल वही सीटें दी जाएंगी जहां उसके पास मजबूत उम्मीदवार और ठोस स्थानीय समीकरण होंगे, ताकि गठबंधन को किसी भी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

बीते चुनावों के आंकड़े और राजनीतिक समीकरण

गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 111 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा था और पार्टी केवल दो सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, 2017 के चुनाव में दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें कांग्रेस ने सौ से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसी पुराने फॉर्मूले को आधार बनाकर कांग्रेस इस बार भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है, हालांकि अंतिम सहमति अभी बनना बाकी है।

अन्य दलों के साथ गठजोड़ की अटकलों पर सख्ती

दूसरी ओर, राज्य के अन्य क्षेत्रीय दलों जैसे सुभासपा और निषाद पार्टी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म रहती हैं। इस बीच सपा खेमे से यह संदेश भी सामने आया है कि पार्टी पदाधिकारियों को एनडीए से जुड़े इन दलों के साथ किसी भी तरह के गठजोड़ के प्रस्ताव से बचने की हिदायत दी गई है, और ऐसा करने वालों पर संगठनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है। फिलहाल दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है।