देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' के बोर्ड ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा एनबीएफसी (NBFC) पंजीकरण सरेंडर करने की अर्जी खारिज किए जाने के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
आरबीआई के विनियामक दबाव के बीच बोर्ड ने संभावित आईपीओ (IPO) से पहले शीर्ष प्रबंधन में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
बोर्ड बैठक के प्रमुख निर्णय
तीन घंटे तक चली टाटा संस की बोर्ड बैठक में दो दूरगामी फैसले लिए गए:
शेयर बाजार में लिस्टिंग की मंजूरी: आरबीआई के निर्देशों का अनुपालन करते हुए कंपनी को सार्वजनिक (Go Public) करने और आईपीओ लाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।
चेयरमैन का कार्यकाल विस्तार: एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल का नया कार्यकाल देने का प्रस्ताव पास किया गया।
हालांकि, इन फैसलों पर मतदान के दौरान बोर्ड में मतभेद भी देखने को मिले। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के विस्तार और लिस्टिंग के विरोध में मतदान किया, लेकिन बोर्ड के अन्य निदेशकों के बहुमत से यह प्रस्ताव पारित हो गया। दोनों निर्णयों को आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
आरबीआई के कड़े रुख के बाद आईपीओ की मजबूरी
टाटा संस की लिस्टिंग का पूरा मामला आरबीआई के विनियामक ढांचे से जुड़ा है:
'अपर-लेयर' एनबीएफसी का नियम: सितंबर 2022 में आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर-लेयर' गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए तीन साल के भीतर (सितंबर 2025/2026 तक) शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था।
अर्जी खारिज: लिस्टिंग से बचने के लिए कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया कर्ज चुका दिया था और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन दिया था। लेकिन 11 सितंबर 2026 को आरबीआई ने इस आवेदन को खारिज करते हुए तुरंत लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
शेयरधारकों के बीच खिंचे राजनीतिक-कॉरपोरेट तीर
टाटा संस के मालिकाना हक को लेकर दो प्रमुख समूहों में राय बंटी हुई है:
टाटा ट्रस्ट्स (66% हिस्सेदारी): टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति और जल्दबाज़ी में लिस्टिंग का विरोध किया। ट्रस्ट्स का कहना है कि यह निर्णय नियमों के विपरीत है और चयन समिति को एसोसिएशन के नियमों के अनुसार ही नए उत्तराधिकारी की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
शापूरजी पालोनजी ग्रुप (18.4% हिस्सेदारी): एसपी (SP) ग्रुप लंबे समय से टाटा संस की लिस्टिंग की मांग कर रहा था ताकि उनकी संपत्ति का पारदर्शी मूल्यांकन हो सके और नकदी प्रवाह में सुधार आए।
चंद्रशेखरन का कार्यकाल और प्रभाव
नटराजन चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। 2022 में उन्हें दूसरा कार्यकाल दिया गया था जो फरवरी 2027 तक के लिए था। एअर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे नए व्यवसायों के प्रदर्शन पर नोएल टाटा की चिंताओं के बाद चंद्रशेखरन ने अगस्त 2026 में पद छोड़ने की घोषणा की थी। हालांकि, अब बोर्ड के बहुमत और आरबीआई के कड़े रुख के बाद उन्हें पांच साल का नया विस्तार दिया गया है।
टाटा संस का सार्वजनिक होना भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक माना जा रहा है, जिससे कॉरपोरेट गवर्नेंस में पारदर्शिता बढ़ेगी और समूह की कंपनियों को नीतिगत निरंतरता मिलेगी।








