दौसा। दौसा जिले के सैथल उपखंड के अंतर्गत आने वाली सिण्डोली ग्राम पंचायत की निमड्या ढाणी में लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के दो दिवसीय 32वें मेले के दौरान एक बेहद रोमांचक वाकया सामने आया। मेले के मुख्य आकर्षण के रूप में तेजाजी के घुड़ले देवीसहाय मीणा ने हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में एक जीवित काले नाग को अपनी जीभ पर रखवाया। इस दौरान सांप के जीभ पर डसने का दावा किए जाने के बाद पूरा मेला परिसर 'जय वीर तेजाजी' और 'जय नाग देवता' के नारों से गूंज उठा।
भजन संध्या और उमड़ा भारी जनसमूह
श्रीवीर तेजाजी सेवा समिति के प्रबंधन में आयोजित इस वार्षिक मेले में मंगलवार को भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की। सुबह से ही भक्त तेजाजी के मंदिर में माथा टेककर प्रसाद चढ़ा रहे थे। वहीं रात्रि के समय 'सेठ सांवरिया म्यूजिकल ग्रुप एंड पार्टी' के जाने-माने गायक कलाकार रूपसिंह की भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसी बीच, मेला संचालक श्यामभाई महेश्वरा द्वारा मंच से तेजाजी के घुड़ले द्वारा नाग देवता के दर्शन कराने की घोषणा करते ही दर्शकों की उत्सुकता और अधिक बढ़ गई।
जिंदा नाग का जीभ पर टिके रहना बना कौतूहल का विषय
पारंपरिक वेशभूषा में मंच पर पहुंचे घुड़ले देवीसहाय मीणा के हाथों में एक जीवंत काला नाग था। पुजारी के मंत्रोच्चार के बीच घुड़ले ने उस सांप को अपनी जीभ पर स्थापित कर लिया। कार्यक्रम के दौरान सांप द्वारा जीभ पर डसने और कुछ देर तक वहीं टिके रहने का यह दृश्य देखकर उपस्थित जनसमूह हैरान रह गया। महिलाओं ने हाथ जोड़कर अपनी मन्नत मांगी, तो पुरुषों ने तेजाजी महाराज के जयकारे लगाए। लगभग दो मिनट तक यह क्रम चलने के बाद घुड़ले ने नाग को सावधानीपूर्वक वापस टोकरी में सुरक्षित रख लिया और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। लोक मान्यताओं के अनुसार तेजाजी को सर्पदंश से जुड़ी विशेष आस्था के चलते पूजा जाता है।
छतों और पेड़ों पर बैठकर लोगों ने सुनी भजन संध्या
मेले में जुटी विशाल भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समिति द्वारा स्थापित 2,000 लोगों की क्षमता वाला बड़ा पंडाल भी छोटा पड़ गया। स्थिति यह बन गई कि कई लोगों को पास के मकानों की छतों और नीम के पेड़ों पर बैठकर भजन संध्या का आनंद लेना पड़ा।
सिण्डोली के अलावा कालीपहाड़ी, तलावड़ा, झेरा, सिकराय, महवा और मंडावरी सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण इस आयोजन के साक्षी बने। इससे पहले दिन के सत्र में निकाली गई मनमोहक झांकियों ने भी सभी का मन मोह लिया, विशेषकर गायों की रक्षा के लिए तेजाजी द्वारा बलिदान दिए जाने के प्रसंग ने कई श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। गायक रूपसिंह ने 'तेजाजी थारा डंका बाजे' और 'नाग देवता थारी महिमा भारी' जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
संस्कृति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है आयोजन
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे युवा नेता राकेश मीना कालीपहाड़ी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन जनमानस की लोक देवताओं के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाते हैं। इससे समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर मिलने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का अवसर प्राप्त होता है।
इस सफल आयोजन के पीछे सिण्डोली सरपंच बद्रीनारायण मीना, सीताराम झेरा, रामकिशोर तलावड़ा, प्रेमप्रकाश कटारा और राधेश्याम निमड्या सहित संपूर्ण सेवा समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा यह मेला हर वर्ष अपनी भव्यता नए आयाम छू रहा है।









