नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार सायं चार बजे एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करेंगे। यह घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के मध्य की गई है। इस दौरान उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि संविधान विरोधी तत्वों का चेहरा अब उजागर हो चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने लिखा, "संविधान के विरोधियों का पर्दाफाश हो चुका है। न्याय की जीत सुनिश्चित है। मैं आज सायं चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश को संबोधित करूंगा।"
विवाद की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
राहुल गांधी का यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है, जब निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, आयोग के आंतरिक प्रशासनिक फैसलों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। विवरण के मुताबिक, अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने विगत 10 महीनों के भीतर लगभग 14 बार विभिन्न मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
आंतरिक आपत्तियों में किए गए मुख्य दावे
सामने आई जानकारियों के अनुसार, दोनों आयुक्तों का पक्ष है कि कई महत्वपूर्ण निर्णयों और आधिकारिक आदेशों को जारी करने से पूर्व न तो उन्हें सूचित किया गया और न ही उनकी सहमति ली गई। ये आपत्तियां मुख्यतः विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं के पंजीकरण, आवेदन पत्र (फॉर्म-6) में किए गए संशोधनों, मतदाता सूची से नाम निरस्त करने या जोड़ने, नाम बहाली संबंधी अपीलों तथा मतदाता डेटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों से संबंधित थीं।
फॉर्म-6 में संशोधन और नए पंजीकरण पर उठाए गए सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं के पंजीकरण हेतु प्रयुक्त होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर कड़ा ऐतराज जताया। इस संशोधित फॉर्म में एसआईआर से संबंधित एक नया प्रश्न जोड़ा गया था, जिसके तहत आवेदक से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि क्या उसका अथवा उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पूर्ववर्ती एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।
विवेक जोशी ने मई माह में इस बदलाव पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए तर्क दिया था कि फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के संशोधन हेतु मतदाता पंजीकरण नियमावली में औपचारिक संशोधन आवश्यक है। इस विचार का समर्थन करते हुए सुखबीर सिंह संधू ने भी उक्त बदलाव को अनधिकृत व गैर-कानूनी करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की थी।
निर्वाचन आयोग का पक्ष एवं स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि संस्थान पूरी तरह से संवैधानिक मर्यादाओं और विधि के अनुरूप कार्य करता है। आयोग के अनुसार, वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है, जहां किसी भी विषय पर लिखित प्रस्तुतियां, तकनीकी परामर्श, भिन्न विचार और आंतरिक जांच-पड़ताल एक सामान्य व लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी साफ किया कि उसकी समस्त कार्रवाइयां प्रासंगिक कानूनों तथा स्थापित दिशानिर्देशों के तहत ही संपादित की गई हैं।









