CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी, विपक्षी दलों से कांग्रेस ने मांगा समर्थन

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध विपक्षी दल एक बार पुनः संसद में उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विपक्षी गठबंधन लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में उनके खिलाफ निष्कासन प्रस्ताव का नोटिस देने की योजना बना रहा है। इस संदर्भ में कांग्रेस ने अन्य सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श प्रारंभ कर दिया है। सूत्रों का संकेत है कि यह प्रस्ताव आगामी दो सप्ताह के भीतर संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

क्या एसआईआर को लेकर बढ़ा विवाद?

मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध विपक्ष के इस नए कदम की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा घटनाक्रम है। हालिया प्रकाशित विवरणों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विगत 10 महीनों में आयोग द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों एवं जारी निर्देशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक असहमति व्यक्त की थी। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम निरस्तीकरण एवं मतदाता सूची से जुड़े अन्य प्रशासनिक फैसले शामिल हैं।

विपक्ष ने उठाए आयोग के कामकाज पर सवाल

इन विवरणों के सार्वजनिक होने के पश्चात कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और आंतरिक तंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े किए हैं। विपक्षी नेताओं की मांग है कि यदि संस्था के दो अन्य सदस्यों ने किसी निर्णय पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, तो उन आपत्तियों तथा संबंधित निर्णयों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र समीक्षा कराए जाने की मांग भी की गई है।

आयोग की ओर से प्रस्तुत पक्ष

विपक्षी आरोपों के प्रत्युत्तर में निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर सहित आयोग के समस्त निर्णय आम सहमति के आधार पर ही निष्पादित किए गए हैं। आयोग का कहना है कि किसी भी संवैधानिक निकाय के भीतर भिन्न-भिन्न विचार एवं सुझाव आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, और वैचारिक भिन्नता की स्थिति में स्थापित नियमावली के अनुसार ही निर्णय लिए जाते हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यह तीन सदस्यीय निकाय है जिसमें निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाने की व्यवस्था है।

पूर्व में भी दो बार लाया जा चुका है हटाने का प्रस्ताव

मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध विपक्ष द्वारा उठाया गया यह पहला कदम नहीं है। मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में उनके निष्कासन हेतु नोटिस प्रस्तुत किया था, जिस पर 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालाँकि, तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन नोटिसों को अस्वीकृत कर दिया था।

अप्रैल माह में पुनः दिया गया था नोटिस

तत्पश्चात 24 अप्रैल को विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने संबंधी एक अन्य नोटिस प्रेषित किया था, जिस पर 73 सांसदों की सहमति दर्ज थी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, उस प्रस्ताव में नौ विशिष्ट आरोप सूचीबद्ध किए गए थे। विपक्ष ने इसे संविधान के अनुच्छेद 324(5) तथा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत आगे बढ़ाने का प्रयास किया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अंतर्गत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उन्हीं आधारों और प्रक्रिया के माध्यम से पदमुक्त किया जा सकता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित हैं। इसका तात्पर्य यह है कि मात्र नोटिस प्रस्तुत करने से मुख्य चुनाव आयुक्त पद से पृथक नहीं होते, अपितु इसके लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित कठोर संवैधानिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण करना अनिवार्य होता है।

ज्ञानेश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यकाल

आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व ग्रहण किया था। उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी आयोग के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। बहु-सदस्यीय व्यवस्था के तहत आयोग के सभी निर्णय बहुमत के सिद्धांत पर आधारित होते हैं।

आगामी घटनाक्रम और भावी रणनीति

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, आगामी दो सप्ताह में दोनों सदनों में नया नोटिस प्रस्तुत करने की तैयारी अंतिम चरण में है। हालांकि, यह देखना शेष है कि अंतिम प्रस्ताव में कितने सांसदों के हस्ताक्षर होते हैं और उसमें किन-किन बिंदुओं को सम्मिलित किया जाता है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संसद का कौन सा सदन इस नोटिस को सर्वप्रथम स्वीकार करता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है।