AI की मदद से टारगेटिंग में हुई बड़ी चूक? ईरान के स्कूल हमले पर उठे गंभीर सवाल

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वाशिंगटन। ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल पर हुए भीषण अमेरिकी सैन्य हमले को लेकर एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें आधुनिक सैन्य अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की शुरुआती जांच के अनुसार, बीते 28 फरवरी को शजराह तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर दो टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें दागी गई थीं। इस दर्दनाक हमले में 150 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जिनमें कम से कम 123 मासूम बच्चे शामिल थे।

पुरानी खुफिया जानकारी और एआई पर अत्यधिक निर्भरता

जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि लक्ष्य के चयन में पुरानी और अप्रासंगिक खुफिया जानकारी, एआई प्रणालियों पर अत्यधिक भरोसा और फील्ड पर मानवीय निगरानी की भारी कमी मुख्य कारण रहे। अमेरिकी सैन्य डेटाबेस में जिस परिसर को स्कूल के रूप में दर्शाया गया था, उसे वर्षों पहले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की सुविधा के रूप में दर्ज किया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों में कई साल पहले ही उस स्थान पर स्कूल बनने के स्पष्ट संकेत दिख चुके थे। वर्ष 2019 में कुछ अमेरिकी खुफिया विश्लेषकों ने इस बदलाव को नोटिस भी किया था, लेकिन यह अहम अपडेट मुख्य लक्ष्य-निर्धारण डेटाबेस (टारगेट डेटाबेस) में शामिल नहीं किया जा सका।

मावेन स्मार्ट सिस्टम और सॉफ्टवेयर की भूमिका

इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'मावेन स्मार्ट सिस्टम' (Maven Smart System) ने 150 से अधिक अलग-अलग स्रोतों से डेटा एकत्र करके लक्ष्यों के आकलन में मदद की थी। जांच अधिकारियों के मुताबिक, सैन्य कर्मियों का मानना था कि यह एआई प्रणाली पुरानी या विरोधाभासी डेटा को खुद पहचान लेगी। हालांकि, इस सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीक प्रदान करने वाली कंपनी 'पैलेंटिर' ने स्पष्ट किया है कि सॉफ्टवेयर के लिए उपयोग किए गए मूल डेटा या खुफिया जानकारी में मौजूद कमियों की कोई जिम्मेदारी उसकी नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता और पेंटागन की प्रतिक्रिया

इस विनाशकारी हमले पर संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी एक स्वतंत्र जांच बिठाई है, जिसमें टारगेट की पर्याप्त पुष्टि (वेरिफिकेशन) न किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पूरे मामले पर अपनी आंतरिक जांच जारी होने की बात कही है। इस घटना ने युद्ध के मैदान में एआई और एल्गोरिदम के इस्तेमाल पर वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है।