काठमांडू। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए मुखर होकर आवाज उठाने वाले एक प्रमुख संगठन ने पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रही हिंसा की कड़ी निंदा की है। संगठन ने समाज में गहराई तक समा चुकी उस मानसिकता पर करारा प्रहार किया है, जहां अपराध की आलोचना करने के बजाय पीड़ित को ही दोषी ठहराया जाता है और ऑनर किलिंग जैसी कुप्रथाओं को बढ़ावा मिलता है।
पीड़ित को दोषी ठहराने की संस्कृति पर प्रहार
'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) ने देश की मौजूदा सामाजिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा है कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के बाद उनके पहनावे, मूवमेंट, चरित्र और व्यक्तिगत पसंद को लेकर बेवजह सवाल खड़े किए जाते हैं। संगठन का स्पष्ट कहना है कि अपराध का ठीकरा हमेशा पीड़ित के सिर फोड़ने की यह प्रवृत्ति बेहद निंदनीय है।
"महिला के कपड़ों से तय नहीं होता अपराध"
वीओपीएम ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा, "पाकिस्तान में किसी महिला के साथ रेप जैसी जघन्य घटना होने के बावजूद समाज उससे यह सवाल पूछता है कि उसने ऐसा क्या किया था। उसके कपड़ों, जगह या चाल-चलन को आधार बनाकर उसे बार-बार प्रताड़ित किया जाता है। कई बार 'सम्मान' के नाम पर उसकी जान तक ले ली जाती है और लोग अपराधी की निंदा करने की बजाय पीड़िता की पसंद पर बहस करने लगते हैं।"
संगठन ने समाज की इस विकृत सोच को खारिज करते हुए कुछ बुनियादी सच्चाइयां रखीं:
महिला के कपड़ों की वजह से कभी रेप नहीं होता।
रात के समय यात्रा करने से किसी भी हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता।
आपसी भरोसे का मतलब कभी भी शारीरिक सहमति नहीं होता।
किसी पुरुष को मना करने या अस्वीकार करने का मतलब यह कतई नहीं है कि उसे हमला करने या जान लेने का अधिकार मिल गया है।









