संभल केस में बड़ा कानूनी मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने NSA हिरासत का आदेश किया रद्द

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी का केवल कबूलनामा उसे 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (एनएसए) के तहत हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं बन सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मुल्ला अफरोज की 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) को रद्द करते हुए यह बड़ा आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिरासत में लेने वाले सक्षम अधिकारी को किसी भी व्यक्ति पर एनएसए लगाने से पहले अन्य सभी संबंधित परिस्थितियों और तथ्यों पर भी गहराई से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि अफरोज के मामले में अधिकारियों द्वारा ऐसा नहीं किया गया और उन्होंने अपनी कानूनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।

राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अक्टूबर 2025 में संभल में हुई 2024 की सांप्रदायिक हिंसा में कथित भूमिका के आधार पर मुल्ला अफरोज के खिलाफ सख्त 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' लागू किया था। गैर-कानूनी तरीके से 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' का आदेश पारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस दत्ता ने अपने लॉ क्लर्क को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका हाल ही में उनके 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले निधन हो गया था।

क्या है नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA)?

  • एनएसए केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार प्रदान करता है, जो देश या राज्य की सुरक्षा के खिलाफ कार्य कर सकते हैं।

  • इस कानून के तहत हिरासत की अधिकतम अवधि 12 महीने तक हो सकती है, हालांकि इसे आवश्यकतानुसार पहले भी समाप्त किया जा सकता है।

  • इसे स्थानीय प्रशासन द्वारा लागू किया जाता है, लेकिन इसके लिए उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के पूर्व जज की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड से मंजूरी मिलना अनिवार्य है।

  • चूंकि यह एक 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) है न कि सामान्य गिरफ्तारी, इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत मजिस्ट्रेट या अदालत के सामने पेश करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 के दौरान तनाव तब उपजा था, जब वहाँ स्थित शाही जामा मस्जिद का सर्वे अदालत के आदेश पर किया जा रहा था। यह सर्वे इस दावे के बाद शुरू हुआ था कि उस स्थान पर पहले प्राचीन हरिहर मंदिर हुआ करता था। 24 नवंबर को जब सर्वे का दूसरा दौर चल रहा था, तब विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तीखी झड़प हो गई थी। इस हिंसक घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे।