नई दिल्ली (दिल्ली)। नई दिल्ली में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पार्टी द्वारा केंद्र सरकार के समक्ष पाँच प्रमुख माँगे रखी गईं। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक पोस्ट साझा की, जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार करते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खरगे ने अपने संदेश में लिखा है कि वर्तमान समय में कांग्रेस के कंधों पर ठीक वैसे ही जिम्मेदारी आ गई है जैसे कभी ब्रिटिश राज के विरुद्ध संघर्ष करते हुए भारत के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने की थी। जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लंबी लड़ाई लड़कर मताधिकार प्राप्त किया था, ठीक उसी अधिकार को आज एक बार फिर बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
लोकतंत्र की नींव को षड्यंत्रपूर्वक खोखला करने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी इस सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, 'हमारे राष्ट्र निर्माताओं और पुरखों ने जिस सुदृढ़ तथा समावेशी लोकतंत्र की आधारशिला रखी थी, उसे वर्तमान मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों के शासनकाल में अत्यंत सुनियोजित और षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।' खरगे ने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत आम नागरिकों के नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से सुनियोजित ढंग से हटाए जा रहे हैं, और देश का मुख्य चुनाव आयोग वर्तमान सरकार के इशारों पर कार्य करने के लिए विवश प्रतीत होता है।
बाबा साहेब के सिद्धांतों और मताधिकार पर प्रहार
खरगे ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया था कि किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत मर्जी या दबाव के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जा सकेगा। इसके विपरीत, आज प्रशासनिक अधिकारी सत्ताधारी दल और मोदी सरकार के प्रत्यक्ष निर्देशों पर मनमाने तरीके से नाम विलोपन की कार्रवाई कर रहे हैं। डॉ. आंबेडकर ने मताधिकार को संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे अधिक मौलिक और पवित्र आधार माना था, किंतु आज की परिस्थितियों में इस मूल अधिकार का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस जनता ने प्रधानमंत्री को उनके वोटों का चौकीदार नियुक्त किया था, वही आज चुनावी प्रक्रिया और मताधिकार के मामले में लुटेरे की भूमिका में नजर आ रहे हैं।









