सीमेंट खरीदना हुआ महंगा, सितंबर में बढ़ी कीमत; आगे और चढ़ सकते हैं दाम

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नई दिल्ली (दिल्ली)। रियल एस्टेट निर्माण क्षेत्र और मकान खरीदने का सपना देख रहे आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक खबर सामने आई है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सुस्त रहने के बाद, सितंबर के दौरान सीमेंट की खुदरा कीमतों में एक बार फिर तेजी लौट आई है। वित्तीय सेवा फर्म 'सेंट्रम ब्रोकिंग' की एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर माह के दौरान देश भर में सीमेंट की औसत खुदरा कीमत में प्रति 50 किलो की बोरी पर 7 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते अब यह बढ़कर औसतन 356 रुपये प्रति बोरी के स्तर पर पहुँच गई है।

ट्रेड और नॉन-ट्रेड सेगमेंट में कीमतों का हाल

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि सितंबर महीने में 'ट्रेड' और 'नॉन-ट्रेड' दोनों ही प्रमुख सेगमेंट में कीमतें बढ़ी हैं, हालाँकि अधिकांश स्थानीय बाजारों में नॉन-ट्रेड कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक तेजी देखने को मिली है। यदि क्षेत्रीय आधार पर बात की जाए, तो मूल्य वृद्धि के मामले में दक्षिण भारत सबसे आगे रहा, जहाँ प्रति बोरी 11 रुपये की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई।

इसके अतिरिक्त, पश्चिम भारत में औसतन 9 रुपये प्रति बोरी का उछाल आया, जबकि मध्य, पूर्व और उत्तर भारत—इन तीनों ही क्षेत्रों में सीमेंट की कीमतों में 5-5 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि दर्ज की गई। हालाँकि, जुलाई और अगस्त के महीनों में बाजार की कमजोरी के कारण वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अखिल भारतीय औसत ट्रेड मूल्य 351 रुपये प्रति बोरी पर सिमट कर रह गया, जो कि पिछली तिमाही की तुलना में एक रुपये कम है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि सीमेंट विनिर्माता कंपनियाँ अक्टूबर के महीने में एक बार फिर कीमतों में 5 से 20 रुपये प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी करने का प्रयास कर सकती हैं। हालांकि, इन बढ़ी हुई कीमतों का बाजार में टिक पाना पूरी तरह से निर्माण कार्यों की माँग में सुधार और डीलरों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। हाल के हफ्तों में वैश्विक स्तर पर ईंधन (फ्यूल) की कीमतों में आए उछाल के बाद सीमेंट कंपनियों पर उत्पादन लागत का दबाव काफी बढ़ गया है, जिसे नियंत्रित करने के लिए दामों में वृद्धि करना उनकी मजबूरी बन गया है।

ग्राहकों की जेब पर अभी पूरा असर नहीं

इस पूरी स्थिति का एक दिलचस्प पहलू यह है कि कंपनियों की ओर से बिलिंग रेट बढ़ाए जाने के बावजूद कई स्थानीय बाजारों में यह बढ़ोतरी पूरी तरह से अंतिम ग्राहकों तक नहीं पहुँची है। इसका मुख्य कारण यह है कि डीलर अपने त्रैमासिक (क्वार्टरली) लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पुराने दामों पर ही अपना माल बेचते रहे हैं।

हालाँकि, मानसून के सक्रिय असर के कारण जुलाई और अगस्त माह में निर्माण सामग्री की माँग सीमित रही थी, किंतु सितंबर के अंत तक देश के कई हिस्सों में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में सुधार देखा गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस बढ़ोतरी का पूर्ण असर ग्राहकों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगेगा।