जाम से निपटने की तैयारी तेज, केंद्र की ₹1,789 करोड़ की योजना से बदलेगा ट्रैफिक प्रबंधन

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों पर लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव और ट्रैफिक जाम की समस्या से आम जनता को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बढ़ती यातायात समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मौजूदा सड़क नेटवर्क को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक प्रभावी और सुगम बनाने हेतु 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दिल्ली पुलिस के माध्यम से लागू किए जाने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए कुल 1,789.52 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को स्वीकृति प्रदान की है।

परियोजना का उद्देश्य और वैश्विक तर्ज पर स्मार्ट प्रबंधन

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस नई प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम ट्रैफिक डाटा, एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल, ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिये मौजूदा सड़क तंत्र का स्मार्ट और बेहतर प्रबंधन करना है। यह पूरी अत्याधुनिक व्यवस्था राजधानी के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर पर कुल तीन चरणों में लागू की जाएगी। इस परियोजना को आगामी 24 महीनों के भीतर स्थापित करने के बाद अगले 5 वर्षों तक इसका सुचारु संचालन किया जाएगा। वर्तमान में सिंगापुर, दुबई, लंदन, सिडनी और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देशों के प्रमुख शहरों में इसी तर्ज पर आईटीएमएस का उपयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली में वर्तमान समय में पंजीकृत वाहनों की संख्या बढ़कर 71 लाख से अधिक हो चुकी है।

आपातकालीन वाहनों के लिए विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' की सुविधा

इस नई इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय पहलू आपातकालीन वाहनों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। इस तकनीक की मदद से एंबुलेंस या अन्य आपातकालीन वाहनों के गुजरने के समय आवश्यकतानुसार स्वतः 'ग्रीन कॉरिडोर' तैयार किया जा सकेगा। इससे गंभीर मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस को जाम या डायवर्जन वाले इलाकों में फंसने से बचाया जा सकेगा और उन्हें कम से कम समय में अस्पताल पहुँचाने में मदद मिलेगी।

यात्रियों को मिलेंगे डायवर्जन और पार्किंग के लाइव अपडेट्स

आम यात्रियों और वाहन चालकों के लिए इस प्रणाली के लागू होने से सफर सुगम होगा और अनावश्यक रुकावटों से निजात मिलेगी। डिजिटल साइनबोर्ड और अन्य मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से चालकों को रास्ते में संभावित जाम, रूट डायवर्जन, नजदीकी पार्किंग स्थलों पर खाली जगह की उपलब्धता और सड़क की मौजूदा स्थिति की रियल-टाइम जानकारी पहले से ही मिल जाया करेगी। इस संपूर्ण व्यवस्था को एक केंद्रीय 'ट्रैफिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' से संचालित किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक प्रबंधन, यातायात नियमों का सख्ती से पालन और यात्रियों को सटीक सूचना देने जैसे सभी कार्य एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ जाएंगे।

यातायात नियम तोड़ने वालों पर ऑटोमैटिक चालान और निगरानी

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसने के लिए इस परियोजना के तहत कुल 1,029 ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट लोकेशंस (एआई आधारित कैमरे व सेंसर) स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक उपकरणों के माध्यम से रेड लाइट जंप करना, स्टॉप लाइन पार करना, ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार), रॉन्ग साइड (गलत दिशा) में वाहन चलाना, अवैध पार्किंग, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाना तथा गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने जैसे तमाम उल्लंघनों का स्वतः पता चल जाएगा और तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।