भारत-चीन हॉकी फाइनल आज, 44 साल बाद एशियन गेम्स गोल्ड पर टीम इंडिया की नजर

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शानदार और अजेय फॉर्म में खेल रही भारतीय महिला हॉकी टीम एशियन गेम्स के खिताबी मुकाबले में आज गत चैंपियन चीन के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। इस महत्वपूर्ण मैच के दौरान भारतीय महिला टीम की मुख्य निगाहें पूरे 44 साल के लंबे अंतराल के बाद स्वर्ण पदक अपने नाम करने तथा सीधे लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई करने पर टिकी होंगी। टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक चौथा स्थान हासिल करने के बाद पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालिफाई न कर पाने वाली भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक का सीधा टिकट हासिल करना है। खिलाड़ियों की मौजूदा शानदार फॉर्म और विश्व कप के ऐतिहासिक प्रदर्शन को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह संभव नजर आ रहा है, बशर्ते खिलाड़ियों को बड़े मुकाबले के दबाव से पार पाना होगा।

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक का इतिहास और चुनौतियाँ

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों के इतिहास में अब तक केवल एक ही बार स्वर्ण पदक जीता है, जो वर्ष 1982 में दिल्ली में आयोजित खेलों में आया था जब महिला हॉकी को पहली बार इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद से भारतीय टीम वर्ष 1998 और 2018 के फाइनल में पहुँची, लेकिन क्रमशः दक्षिण कोरिया और जापान से हार मिलने के कारण रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था। हालाँकि, युवा और ऊर्जावान खिलाड़ियों से सजी कोच शोर्ड मारिन की यह वर्तमान टीम इस लंबे इंतजार को समाप्त करने और एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त देने का पूरा माद्दा रखती है।

बीते साल उतार-चढ़ाव और खराब फॉर्म से जूझने वाली भारतीय महिला टीम के लिए वर्ष 2026 बेहद यादगार साबित हुआ है। इस साल टीम ने एफआईएच (FIH) नेशंस कप का खिताब जीतकर प्रो लीग में शानदार वापसी की और पिछले महीने नीदरलैंड तथा बेल्जियम में आयोजित विश्व कप में पाँचवाँ स्थान हासिल किया, जो वर्ष 1974 के बाद से इस टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। विश्व कप के दौरान भारत ने ग्रुप चरण के रोमांचक मुकाबले में दुनिया की चौथे नंबर की मजबूत टीम चीन को 2-2 की बराबरी पर रोका था, जबकि इस भारतीय दल के 11 खिलाड़ियों का यह पहला ही विश्व कप था। पूरे विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान भारत एकमात्र मैच सह-मेजबान नीदरलैंड के खिलाफ 0-2 से हारा था।

भारतीय टीम का मजबूत पक्ष और सेमीफाइनल का सफर

दूसरी ओर, खिताबी मुकाबले में पहुँची चीन की टीम को दूसरे सेमीफाइनल में मेजबान जापान ने निर्धारित 60 मिनट के खेल तक गोलरहित बराबरी पर रोके रखा था और अंततः पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से जीत दर्ज करके चीन फाइनल तक का सफर तय कर सका। वहीं, भारत को भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा था, जहाँ मिले 12 पेनल्टी कॉर्नर में से केवल एक पर ही गोल कन्वर्ट हो सका था।

भारत के लिए सेमीफाइनल मुकाबले के 44वें मिनट में इशिका ने और उसके चार मिनट पश्चात कप्तान सलीमा टेटे ने शानदार गोल दागे। गोलकीपिंग विभाग में सविता और बिछू देवी ने विश्व कप की अपनी बेहतरीन फॉर्म को यहाँ भी बरकरार रखा है। भारतीय टीम ने पेनल्टी कॉर्नर और ओपन प्ले दोनों ही माध्यमों से गोल किए हैं, हालाँकि कोरिया के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर की विफलता चिंता का विषय रही है। टूर्नामेंट में स्टार खिलाड़ी दीपिका ने छह मैचों में कुल 21 गोल दागे हैं, जिनमें से 19 गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए हैं, जबकि नवनीत कौर ने 10 गोल दागे हैं जिनमें सात फील्ड गोल शामिल हैं।

हेड टू हेड रिकॉर्ड और मुकाबले का समय

चीनी टीम की बात करें तो उनके लिए झोंग जियाकी ने 9, जबकि चेन यि और झांग यिंग ने 7-7 गोल किए हैं। चीन एशियाई खेलों के इतिहास की सबसे सफल और कामयाब महिला हॉकी टीम रही है, जिसने वर्ष 2023 के हांगझोउ खेलों समेत कुल छह खिताब अपने नाम किए हैं। भारत और चीन के बीच अब तक कुल 28 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से 12 मैचों में चीन ने और 11 मैचों में भारत ने जीत दर्ज की है, जबकि 5 मुकाबले बराबरी (ड्रॉ) पर छूटे हैं। दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमों के बीच यह रोमांचक फाइनल मुकाबला भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा।